नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि कुछ विदेशी संगठन भारत में विरोध प्रदर्शनों को हवा दे रहे हैं। उनके मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व का इन संगठनों से जुड़ाव कई गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने खासतौर पर प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल और इंडियन अलायंस पेरिस का नाम लिया। भाटिया के बयान ऐसे समय आए हैं जब फॉक्स न्यूज डिजिटल की एक पड़ताल चर्चा में है। “ग्लोबल केओस इंक ग्रोज टू 101 ग्रुप्स” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नौ देशों के 101 संगठन प्रदर्शनों के आयोजन, उनके बीच तालमेल या उन्हें बढ़ावा देने में शामिल हैं।
रिपोर्ट में 28 कम्युनिस्ट और समाजवादी युवा संगठनों के एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का भी उल्लेख है। आरोप है कि यह गठबंधन यूरोप भर में छात्रों को संगठित कर हड़तालें करवा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार यह नेटवर्क अमेरिका, ब्रिटेन, ग्रीस, ब्राजील और भारत तक फैला है। अलग-अलग समूह इसके जरिए समर्थकों को जुटाते हैं, हड़ताल का आह्वान करते हैं और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की मदद से आंदोलनों को बड़ा रूप देते हैं। रिपोर्ट में नेविल रॉय सिंघम नेटवर्क और इंडियन अलायंस पेरिस का नाम भी आया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर फ्रांस के प्रदर्शनों का प्रचार किया और उनकी तुलना भारत के छात्र आंदोलनों से की।
भाटिया ने पूरी बातचीत में राहुल गांधी के लिए कई बार “गद्दार” शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “यह उस अराजकता, अव्यवस्था और गद्दारी का मॉडल है, जिसे नेता प्रतिपक्ष देश के सामने रख रहे हैं।” उनका कहना था कि एक प्रतिष्ठित अखबार की रिपोर्ट से साफ होता है कि इन गतिविधियों के तार विदेशी एजेंसियों से जुड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस पूरे घटनाक्रम का सरगना पूछा जाए, तो जवाब राहुल गांधी ही होंगे। भाजपा प्रवक्ता के अनुसार फ्रांस स्थित इंडियन अलायंस पेरिस उन शुरुआती संगठनों में था, जिन्होंने एक प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी की हिरासत से जुड़े वीडियो साझा किए और सोशल मीडिया पोस्ट को आगे बढ़ाया। भाटिया ने सवाल उठाया कि क्या यह गतिविधि विदेशी समूहों की उस कोशिश की ओर इशारा करती है, जिसमें वे भारत के आंतरिक राजनीतिक मामलों पर चल रही बहस को प्रभावित करना चाहते हैं। उन्होंने इसे चुनी हुई सरकारों और संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देने की सोची-समझी रणनीति बताया।
प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल का जिक्र करते हुए भाटिया ने कहा कि यह संगठन खुद को पूंजीवाद-विरोधी अंतरराष्ट्रीय मंच बताता है। उनका दावा था कि रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस की अशांति और ऐतिहासिक स्मारकों में तोड़फोड़, स्पेन की घटनाएं, भारत का मौजूदा माहौल और अल्बानिया के हालात, सब इसी संगठन से जुड़े हैं। उन्होंने कांग्रेस की ओर से किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला भी दिया। यह पोस्ट अप्रैल 2025 में नई दिल्ली के 10 जनपथ पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और एक संगठन के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात से जुड़ा था। भाटिया के शब्दों में, “जहां भी चुनी हुई सरकार होती है, ये उसे गिराना चाहते हैं। ये सुप्रीम कोर्ट और संसद जैसी संस्थाओं के साथ ऐतिहासिक इमारतों को भी नष्ट करना चाहते हैं।”
इसी क्रम में उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की अल्बानिया के प्रदर्शनों से जुड़ी एक सोशल मीडिया पोस्ट का भी उल्लेख किया। उनका आरोप था कि इसे संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ हुई कार्रवाइयों के समर्थन के तौर पर पढ़ा जा सकता है। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रदर्शनकारियों के नारों से जोड़ते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की बड़ी कोशिश का हिस्सा है। भाटिया ने ब्रिटिश सांसद जेरेमी कॉर्बिन और अमेरिकी कांग्रेस सदस्य इल्हान उमर से राहुल गांधी की मुलाकातों की भी आलोचना की। उनका कहना था कि कश्मीर पर इन नेताओं का रुख भारत के हितों के विरुद्ध है। उन्होंने राहुल पर ऐसे संगठनों से समर्थन मांगने का आरोप लगाया, जिन्हें उन्होंने “भारत-विरोधी” कहा। उन्होंने पूछा कि संगठन भले भारत-विरोधी हों, पर देश का नेता प्रतिपक्ष भारत-विरोधी कैसे हो सकता है।
भाजपा ने राहुल गांधी और कांग्रेस से स्पष्टीकरण मांगा है। पार्टी चाहती है कि कांग्रेस बताए कि प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के साथ हुई बैठक में क्या बातचीत हुई और क्या किसी तरह का समझौता हुआ। साथ ही इन संगठनों की फंडिंग के स्रोत सार्वजनिक किए जाएं, जिनमें विदेशी व्यक्तियों या संस्थाओं से संबंध भी शामिल हैं। भाटिया ने कहा, “विरोध करना मौलिक अधिकार है, लेकिन तोड़फोड़, संस्थाओं को नष्ट करना, आगजनी और हिंसक प्रदर्शन मौलिक अधिकार नहीं हैं।” यह ध्यान देना जरूरी है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेश की गई सामग्री से यह साबित नहीं होता कि भारत के विरोध प्रदर्शनों को प्रभावित करने के लिए कोई सुनियोजित प्रयास हुआ था। फिलहाल ये सभी बातें भाजपा के आरोप और एक विदेशी मीडिया रिपोर्ट के दावे हैं। इन पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

























