देशभर में आज यानी 14 सितंबर से गणेश चतुर्थी के साथ गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई है। अगले 10 दिनों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में गणपति बप्पा की भक्ति और उत्सव का माहौल देखने को मिलेगा। घरों से लेकर बड़े-बड़े पंडालों तक भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। बाजार भी गणेश उत्सव के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। फूल-मालाओं, सजावटी सामान, पूजा सामग्री से लेकर गणेश प्रतिमाओं और प्रसाद की दुकानों तक लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है।

इस बार गणेशोत्सव सिर्फ धार्मिक आस्था और उत्सव तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि कारोबार के लिहाज से भी काफी बड़ा साबित होने की उम्मीद है। कारोबारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुमान के मुताबिक, इस साल गणेशोत्सव के दौरान देशभर में 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह पिछले वर्षों की तुलना में बड़ा उछाल होगा।

गणेश उत्सव के दौरान हर साल बाजार में खरीदारी बढ़ती है। वर्ष 2024 में इस त्योहार के दौरान करीब 30 हजार करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान लगाया गया था। वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 30 से 40 हजार करोड़ रुपये के बीच पहुंच गया था। अब 2026 में कारोबार के 50 हजार करोड़ रुपये से ऊपर जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। कारोबारियों को उम्मीद है कि इस बार लोगों की बढ़ी हुई खरीदारी, बड़े स्तर पर होने वाले सामुदायिक कार्यक्रम और गणेश पंडालों पर होने वाला खर्च बाजार को और रफ्तार देगा।

गणेशोत्सव के दौरान बड़े शहरों में भव्य पंडाल और आकर्षक झांकियां लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहती हैं। इन पंडालों की सजावट, लाइटिंग, साउंड सिस्टम, फूलों की सजावट, मूर्तियों और आयोजन से जुड़ी दूसरी सेवाओं पर बड़ी रकम खर्च होती है। मुंबई, पुणे, दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु, अहमदाबाद और देश के कई अन्य शहरों में गणेश उत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाता है। यहां स्थानीय दुकानदारों के साथ-साथ इवेंट मैनेजमेंट, डेकोरेशन, कैटरिंग, परिवहन और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को भी इसका सीधा फायदा मिलता है।

इस बार गणेशोत्सव की खरीदारी में स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों की मांग भी बढ़ने की उम्मीद है। गणेश प्रतिमाओं से लेकर पूजा सामग्री, सजावटी सामान, फूल, मिट्टी के दीये, कपड़े और अन्य वस्तुओं की खरीदारी में लोग स्थानीय बाजारों का रुख कर रहे हैं। कारोबारी संगठनों का कहना है कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की सोच ने छोटे और स्थानीय कारोबारियों को नया बाजार दिया है। लोग स्थानीय कारीगरों और दुकानदारों से सामान खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे त्योहार का पैसा सीधे छोटे कारोबार और स्थानीय अर्थव्यवस्था तक पहुंच रहा है।

गणेशोत्सव के दौरान सिर्फ बड़े सार्वजनिक पंडाल ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में भी गणपति की स्थापना करते हैं। कई परिवार एक दिन के लिए गणेश जी की पूजा करते हैं, जबकि कुछ जगहों पर तीन, पांच, सात या पूरे 10 दिनों तक गणपति विराजमान रहते हैं। इस दौरान हर दिन पूजा-अर्चना, आरती और प्रसाद वितरण किया जाता है। कई इलाकों में भंडारे और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इससे फूल, मिठाई, फल, पूजा सामग्री और खान-पान से जुड़े कारोबार में भी तेजी आती है।

गणेशोत्सव का असर सिर्फ पूजा सामग्री के बाजार तक नहीं रहता। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग दूसरे शहरों में होने वाले प्रसिद्ध गणपति उत्सवों में शामिल होने के लिए यात्रा करते हैं। इससे होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी, बस और अन्य पर्यटन सेवाओं को भी फायदा मिलता है। खासकर महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे जैसे शहरों में गणेश उत्सव देखने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग पहुंचते हैं। ऐसे में त्योहार के दौरान स्थानीय कारोबार के साथ पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं।

गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ यह उत्सव करीब 10 दिनों तक चलेगा। अलग-अलग परंपराओं के अनुसार कई परिवार और मंडल अपनी सुविधा के हिसाब से गणपति विसर्जन करते हैं, जबकि सार्वजनिक स्तर पर आयोजित कई गणेश उत्सवों का समापन 25 सितंबर को गणेश विसर्जन के साथ होगा। विसर्जन के दिन भी बाजारों में फूल, प्रसाद, पूजा सामग्री और सजावट से जुड़ी खरीदारी बनी रहती है। कई शहरों में इस दौरान बड़ी शोभायात्राएं निकाली जाती हैं और लोग ढोल-नगाड़ों के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं।

गणेश उत्सव का बढ़ता कारोबार छोटे दुकानदारों, मूर्तिकारों, कारीगरों और स्थानीय सेवा प्रदाताओं के लिए भी बड़ा अवसर लेकर आता है। गणेश प्रतिमा बनाने वाले कलाकार कई सप्ताह पहले से इसकी तैयारी शुरू कर देते हैं। वहीं सजावट, लाइटिंग, फूल और पूजा सामग्री बेचने वाले दुकानदार भी त्योहार से पहले अपना स्टॉक बढ़ा लेते हैं। ऐसे में इस साल 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कारोबार का अनुमान त्योहार की बढ़ती आर्थिक गतिविधियों को भी दिखाता है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ गणेशोत्सव स्थानीय बाजार, छोटे व्यापार और स्वदेशी उत्पादों के लिए भी एक बड़ा अवसर बनता जा रहा है।

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