नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रेस वार्ता की। इसमें पार्टी के नेता आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखे आरोप लगाए। उनका कहना था कि केंद्र सरकार ज्ञानेश कुमार को बचाने में जुटी है और देश के हालात अब आपातकाल से भी ज्यादा खराब हो चुके हैं। रांका ने कहा कि यह संघर्ष शुरू में चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ था। उनके मुताबिक, सरकार के रुख ने इसे बदल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने ज्ञानेश कुमार को हर हाल में बचाने का फैसला कर लिया है, इसलिए अब यह लड़ाई उनकी अपनी लड़ाई बन गई है। तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “राजा की जान तोते में है।”
सीजेपी नेता ने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग पूरी तरह मोदी-शाह के इशारे पर काम कर रहा है। उनका आरोप था कि मुख्य चुनाव आयुक्त का मकसद केवल भारतीय जनता पार्टी को चुनाव जिताना है। ये सभी बातें रांका ने अपनी पार्टी की ओर से रखे गए आरोपों के रूप में कहीं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रेस वार्ता में सबसे ज्यादा जोर एक दिन पहले की घटना पर रहा। रांका के अनुसार, उन्हें, सौरव दास और अभिजीत दिपके को फ्लाइट के भीतर से हिरासत में लिया गया। उन्होंने इसे “किडनैपिंग” करार दिया और कहा कि दिल्ली पुलिस ने बर्बरता दिखाई। उन्होंने यह भी कहा, “भाजपा ने आपातकाल को भी पीछे छोड़ दिया है।” रांका ने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के साथ ऐसा बर्ताव उचित है। उनका कहना था कि पूरे देश ने यह कार्रवाई देखी है और लोग इसे अपनी आंखों से परख सकते हैं।
रांका ने बताया कि हिरासत वाले दिन ही अभिजीत दिपके की दादी का निधन हो गया। उनके अनुसार, जब दिपके को यह दुखद खबर दी गई, उस समय भी दिल्ली पुलिस कैमरे और माइक लेकर मौके पर मौजूद थी। उन्होंने इसे अमानवीय व्यवहार बताया और कहा कि इससे देश के लोगों को शर्मिंदगी महसूस हो रही है। रांका ने कहा कि दिपके अपने निजी दुख को सार्वजनिक तमाशा नहीं बनाना चाहते थे और नहीं चाहते थे कि उनका निजी मामला इस विवाद से जुड़े। फिलहाल वे अपने गांव गए हैं। रांका ने साफ किया कि इसके बावजूद आंदोलन रुकने वाला नहीं है। उनके शब्दों में, यह लड़ाई अब शुरू हो चुकी है।
इस मामले में दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार या चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हिरासत के कारणों और कार्रवाई की परिस्थितियों पर भी आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है। इसलिए ऊपर लिखी बातें सीजेपी नेता के आरोप और दावे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर चल रहा विरोध फिलहाल थमता नहीं दिख रहा। सीजेपी के नेताओं का रुख बताता है कि वे इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाने की तैयारी में हैं। अब निगाहें इस पर हैं कि सरकार और चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं।























