कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक पहले शनिवार को राजधानी का माहौल तनावपूर्ण हो गया। सुबह यूट्यूबर ध्रुव राठी को गुरुग्राम में पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके कुछ ही देर बाद पार्टी के बाकी प्रमुख चेहरों के भी पुलिस की गिरफ़्त में आने की खबरें सामने आने लगीं। मिली जानकारी के मुताबिक सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया। उनके साथ सौरव और रांका को भी पुलिस ने रोक लिया। यानी जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही आयोजकों की पहली कतार पुलिस की निगरानी में आ चुकी है।
पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जुटने का एलान किया था। वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का भी विरोध कर रही है। शुक्रवार देर रात जारी वीडियो संदेश में दीपके ने समर्थकों से भारी संख्या में पहुंचने की अपील की थी। उन्होंने साफ़ कहा था कि वे न हिरासत से डरते हैं, न सख़्त क़ानूनों से, और प्रदर्शन शांतिपूर्ण व अहिंसक रहना चाहिए। उधर दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद के अनुसार आवेदन बहुत कम समय पहले आया, जबकि इसके लिए दस दिन पहले अर्ज़ी देनी होती है। उन्होंने पिछले प्रदर्शन में नियमों की अनदेखी का भी हवाला दिया। नई दिल्ली में बीएनएसएस की धारा 163 लागू है।
सुरक्षा के इंतज़ाम असाधारण हैं। करीब 23 हज़ार सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जिनमें केंद्रीय बलों की 221 कंपनियां शामिल हैं। 45 मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी है और दिल्ली आने वाली 250 ट्रेनें रद्द की गई हैं। उत्तर प्रदेश और हरियाणा से लगती सीमाओं पर बैरिकेडिंग की गई है। जंतर-मंतर के चार किलोमीटर के दायरे में रात 10 बजे तक इंटरनेट बंद रहेगा, जबकि स्कूल-कॉलेज भी बंद हैं। गृह मंत्रालय ने राज्यों को दिल्ली पुलिस के साथ तालमेल बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इन पाबंदियों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आई हैं। वाम दलों ने संयुक्त बयान जारी कर रोक-टोक की निंदा की। इधर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निर्देश दिया था कि मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूरी तरह रोक न लगे। अदालत के मुताबिक अनियंत्रित आवाजाही रोकी जा सकती है, पर आम नागरिकों को बेवजह परेशानी नहीं होनी चाहिए।























