नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों का आंदोलन सोमवार को एक नए मोड़ पर पहुंच गया। सुबह जब लगा कि लंबे समय से चल रही भूख हड़ताल अब थम जाएगी, तब दोपहर होते-होते छात्रों ने संशोधित मांगों के साथ अनशन दोबारा शुरू कर दिया। इसके बाद कैंपस का माहौल गर्म हो गया और हालात संभालने के लिए दो छात्रों को हिरासत में लेना पड़ा। सोमवार की सुबह भूख हड़ताल समाप्त होने की खबर आई थी। छात्रों और प्रशासन के बीच बात आगे बढ़ती दिख रही थी, लेकिन दोपहर में तस्वीर बदल गई। आंदोलनकारी छात्रों ने नई और संशोधित मांगें सामने रखीं और फिर से अनशन पर बैठ गए। साथ ही प्रदर्शन मार्च निकालने का ऐलान भी कर दिया गया। घोषणा होते ही बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में जुट गए।
आंदोलन के केंद्र में छात्रसंघ का प्रस्तावित मसौदा है। बीते 12 अक्टूबर से अनशन कर रहे मोहम्मद रेहान और एबिन का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मसौदे को अंतिम रूप देने और उसे मंजूरी देने की कोई समय-सीमा तय नहीं कर रहा। छात्रों के मुताबिक असली अड़चन यही अनिश्चितता है। उनका तर्क है कि जब तक तारीख साफ नहीं होगी, तब तक यह भरोसा नहीं बनेगा कि प्रक्रिया वाकई आगे बढ़ेगी। प्रशासन के खिलाफ नारे लगाते छात्रों को देखकर सुरक्षाकर्मी तुरंत हरकत में आ गए। विश्वविद्यालय के गेट पर कड़ा पहरा लगा दिया गया ताकि हालात काबू में रहें। इसके बावजूद छात्र अपनी बात पर डटे रहे और विरोध जारी रखा। माहौल बिगड़ता देख दो छात्रों को हिरासत में ले लिया गया।
इस प्रदर्शन की एक खास बात छात्राओं की भागीदारी रही। महिला छात्रावास से भी बड़ी संख्या में छात्राएं बाहर निकलकर आंदोलन में शामिल होती दिखीं। इससे प्रदर्शन को और बल मिला और कैंपस में हलचल बढ़ गई। दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना हुआ है। छात्र चाहते हैं कि मसौदे को अंतिम रूप देने और उसे लागू करने की स्पष्ट समय-सीमा घोषित हो। प्रशासन की ओर से इस ताजा घटनाक्रम पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। अनशन पर बैठे छात्रों की सेहत भी चिंता का विषय बनी हुई है, इसलिए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बातचीत का रास्ता निकालना दोनों पक्षों के लिए जरूरी होगा। हिरासत में लिए गए छात्रों को लेकर भी साथी छात्रों में नाराजगी है, जिससे आंदोलन के और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
























