नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल कराने की मांग को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब नए विवाद में घिर गया है। परिसर की दीवारों पर आपत्तिजनक और विवादित नारे लिखे मिले, जिसके बाद विश्वविद्यालय का माहौल तनावपूर्ण हो गया। मामले को गंभीर मानते हुए कुलपति ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। छात्र 12 अक्तूबर से छात्र संघ चुनाव की बहाली समेत कई मांगों पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। जासिम अली, एबिन, रिहान हैदर और रिहान पंवार अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक चुनाव का कार्यक्रम घोषित नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे। प्रशासन ने इस बीच चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के लिए नए सिरे से संविधान तैयार करने हेतु एक समिति बनाई है। छात्रों को यह कदम पर्याप्त नहीं लगता। उनकी मांग है कि पहले चुनाव की तारीखों का एलान हो। शुक्रवार शाम समिति ने छात्रों के साथ दोबारा बातचीत शुरू की, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
परिसर में कई जगह दीवारों पर विवादित नारे लिखे पाए गए। जांच में सामने आया कि जिन स्थानों पर नारे लिखे गए, वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की तारें भी तोड़ दी गई थीं। इससे संदेह गहराया है कि यह काम सोच-समझकर किया गया। प्रशासन ने रसायनों की मदद से दीवारों से नारे हटाने का काम शुरू कर दिया है। जामिया के एक अधिकारी ने नारे लिखने वालों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि दोषियों की पहचान की कोशिश की जा रही है और पहचान होते ही उचित कार्रवाई होगी। सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। भूख हड़ताल पर बैठे रिहान हैदर ने कहा कि दीवारों पर ये नारे असामाजिक तत्वों ने लिखे हैं। उनके मुताबिक इसका मकसद छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करना है। उन्होंने इस हरकत की निंदा करते हुए कहा कि छात्रों की मांग केवल लोकतांत्रिक अधिकार की बहाली है और इसका इन नारों से कोई लेना-देना नहीं।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने इन घटनाओं पर सख्त रुख अपनाया है। संगठन ने दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है। देशविरोधी लेखन के मामले सामने आने की बात भी कही जा रही है। इस मुद्दे ने आंदोलन के साथ-साथ राजनीतिक बहस को भी हवा दे दी है। शुक्रवार को आंदोलन के बीच राजनीतिक हलचल भी तेज रही। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वे दीवार पर सीढ़ी लगाकर परिसर में दाखिल होते दिख रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसी तरह प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। कुछ देर बाद दोनों सांसदों और उनके समर्थकों को छोड़ दिया गया। पूरे मार्ग पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सबकी नजर कुलपति की उच्च स्तरीय बैठक और छात्रों से जारी बातचीत पर है। एक ओर प्रशासन नारे लिखने वालों की तलाश में है, दूसरी ओर आंदोलनकारी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा पर अड़े हैं। यह देखना अहम होगा कि समिति की वार्ता से कोई समाधान निकलता है या भूख हड़ताल और लंबी खिंचती है।






















