छात्रों का शक्ति प्रदर्शन: झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थी सोमवार, 10 अगस्त 2026 को सड़कों पर उतर आए। विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों ने रांची में विधानसभा की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने रास्ते में कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की थी। जैसे ही छात्रों ने दूसरी बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश की, पुलिस ने पानी की बौछार शुरू कर दी।

छात्रों का शक्ति प्रदर्शन

इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किए जाने की भी खबर सामने आई। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, अनियमितताओं और अभ्यर्थियों की शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

हजारों अभ्यर्थी विधानसभा की ओर निकले

सोमवार सुबह से ही अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में छात्र और सरकारी नौकरी के अभ्यर्थी रांची में जुटने लगे। हाथों में पोस्टर और बैनर लिए प्रदर्शनकारी सरकार से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रक्रिया की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राज्य में अलग-अलग सरकारी भर्तियों से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थियों के बीच असंतोष है।

हजारों अभ्यर्थी विधानसभा की ओर निकले

उनका कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता का सीधा असर उन युवाओं के भविष्य पर पड़ता है, जो कई वर्षों तक मेहनत करके सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं। छात्रों का कहना है कि एक परीक्षा की तैयारी में उनका पैसा, समय और उम्र तक दांव पर लगी होती है। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि हजारों युवाओं के करियर पर असर पड़ता है।

दूसरी बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश, पुलिस ने छोड़ी पानी की बौछार

विधानसभा की तरफ बढ़ रहे छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने रास्ते में कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शनकारी जब दूसरी लाइन की बैरिकेडिंग के करीब पहुंचे तो उन्होंने आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। पानी की तेज धार के बावजूद प्रदर्शनकारी मौके से हटने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद वहां धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाना चाहते हैं। वहीं पुलिस का प्रयास था कि प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर आगे बढ़ने से रोका जाए।

लाठीचार्ज के बाद बढ़ा छात्रों का आक्रोश

पानी की बौछार के बाद जब प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे तो पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई। कई प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई के बावजूद मौके पर डटे रहे। उनका कहना है कि वे अपने भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और केवल पुलिस की कार्रवाई के डर से पीछे नहीं हटेंगे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव को देखते हुए विधानसभा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। रास्तों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई है और बैरिकेडिंग के जरिए भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।

लाठीचार्ज के बाद बढ़ा छात्रों का आक्रोश

9 दिन से भूख हड़ताल पर हैं देवेंद्र नाथ महतो

इस आंदोलन में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता देवेंद्र नाथ महतो भी शामिल हुए। वह भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। लगातार भूख हड़ताल के कारण उनके वजन में करीब 10.5 किलोग्राम की कमी बताई जा रही है। इसके बावजूद वह सोमवार को छात्रों के विधानसभा मार्च में शामिल हुए। मार्च के दौरान महतो के हाथ में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन का चित्र भी दिखाई दिया। उनकी मौजूदगी ने प्रदर्शन को और चर्चा में ला दिया।

भूख हड़ताल के बावजूद आंदोलन में पहुंचे

नौ दिनों से भूख हड़ताल पर रहने के बाद भी प्रदर्शन में शामिल होना बताता है कि आंदोलनकारी अपने मुद्दे को लेकर कितने गंभीर हैं। महतो के समर्थकों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। छात्रों के बीच भी यह चर्चा है कि लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बार-बार परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी की एक सीट के लिए हजारों युवा मेहनत करते हैं, इसलिए परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

छात्रों की मुख्य मांग क्या है?

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। छात्र चाहते हैं कि जिन परीक्षाओं को लेकर शिकायतें और अनियमितताओं के आरोप हैं, उनकी निष्पक्ष तरीके से जांच हो। इसके अलावा प्रदर्शनकारी परीक्षा से जुड़े मामलों में अभ्यर्थियों की शिकायतों का समाधान, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और भविष्य की परीक्षाओं को लेकर स्पष्ट व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि सरकारी भर्ती सिर्फ नौकरी पाने का जरिया नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों के लिए आर्थिक स्थिरता की उम्मीद भी है। इसलिए परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी से प्रभावित होने वाले अभ्यर्थियों की बात गंभीरता से सुनी जानी चाहिए।

‘पीछे नहीं हटेंगे’, प्रदर्शनकारियों का ऐलान

पुलिस की कार्रवाई के बाद भी प्रदर्शनकारी मौके पर डटे हुए हैं। उनका कहना है कि आंदोलन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार और अपने अधिकारों के लिए है। छात्रों के बीच लगातार नारेबाजी होती रही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर स्पष्ट जवाब नहीं देती, तब तक आंदोलन को खत्म करने का सवाल ही नहीं उठता।

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 विधानसभा के आसपास बढ़ाई गई सुरक्षा

छात्रों के विधानसभा मार्च को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने विधानसभा की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की है, ताकि प्रदर्शनकारी सीधे विधानसभा परिसर की तरफ न बढ़ सकें। स्थिति पर नजर रखने के लिए पुलिस बल को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया है। प्रदर्शनकारियों की संख्या को देखते हुए प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती भीड़ को नियंत्रित करना और किसी बड़े टकराव को रोकना है।

 विधानसभा के आसपास बढ़ाई गई सुरक्षा

युवाओं के गुस्से की वजह समझना जरूरी

झारखंड में सामने आया यह प्रदर्शन केवल एक दिन का विरोध नहीं है। इसके पीछे उन हजारों युवाओं की नाराजगी है, जो सरकारी नौकरी की तैयारी में वर्षों लगा देते हैं। एक अभ्यर्थी के लिए परीक्षा की तारीख, एडमिट कार्ड, परीक्षा केंद्र और रिजल्ट—हर चरण उसके भविष्य से जुड़ा होता है।

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अगर किसी चरण पर अनियमितता का आरोप लगता है तो उसके मन में पूरी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो जाते हैं। यही वजह है कि सोमवार को रांची की सड़कों पर उतरे छात्रों का कहना है कि उनकी आवाज को दबाने के बजाय उनकी शिकायतों का समाधान किया जाना चाहिए।

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