उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच शाही मस्जिद को लेकर हुए विवाद में इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुई AI से तैयार तस्वीरों और वीडियो ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि मस्जिद को पूरी तरह गिराए जाने का दावा करते हुए कुछ भ्रामक और भड़काऊ पोस्ट सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए। इन पोस्ट के जरिए लोगों को मौके पर पहुंचने के लिए उकसाया गया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर प्रशासन की ओर से कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई थी। कार्रवाई के दौरान मौके पर विवाद की स्थिति बन गई और बड़ी संख्या में लोग वहां जुटने लगे। देखते ही देखते मामला पुलिस और भीड़ के बीच टकराव तक पहुंच गया।
पुलिस के अनुसार, मौके पर तनाव बढ़ने की एक बड़ी वजह इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुए कुछ पोस्ट रहे। इन पोस्ट में कथित तौर पर यह दावा किया गया कि शाही मस्जिद को पूरी तरह तोड़ा जा रहा है। पुलिस का कहना है कि कुछ तस्वीरें और वीडियो AI की मदद से तैयार या बदले हुए प्रतीत हुए, जिन्हें वास्तविक घटना के तौर पर सोशल मीडिया पर साझा किया गया। इन पोस्ट के बाद लोगों के बीच गलत जानकारी तेजी से फैली। कई लोगों ने बिना इसकी पुष्टि किए पोस्ट को आगे शेयर कर दिया। पुलिस का आरोप है कि कुछ पोस्ट सिर्फ भ्रामक नहीं थे, बल्कि उनके जरिए लोगों को मौके पर पहुंचने और विरोध करने के लिए उकसाया गया।
भ्रामक सूचनाओं के प्रसार के बाद शाही मस्जिद के आसपास लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। मौके पर पहले से मौजूद पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। हालांकि, भीड़ बढ़ने के साथ माहौल तनावपूर्ण हो गया और पुलिस के साथ टकराव की स्थिति पैदा हो गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। इसके साथ ही आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। पुलिस और प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई और अफवाहों पर भरोसा नहीं करने को कहा गया।
मामले को लेकर पुलिस ने सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भ्रामक और भड़काऊ सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 196(1), 299, 353(2) और 3(5) के तहत FIR दर्ज की है। जांच के दौरान पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और तस्वीरों की पड़ताल कर रही है। पुलिस का कहना है कि कुछ ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिन्होंने कथित तौर पर भड़काऊ संदेशों को शेयर या प्रसारित किया था। इन लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इस पूरे मामले में AI से तैयार की गई तस्वीरें और वीडियो पुलिस के लिए एक नई चुनौती के तौर पर सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर किसी घटना से जुड़ी तस्वीर या वीडियो सामने आने के बाद लोग उसे तुरंत सच मान लेते हैं और बिना पुष्टि किए आगे बढ़ा देते हैं। यही वजह है कि गलत या बदली हुई सामग्री कुछ ही समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकती है। उज्जैन पुलिस अब ऐसे डिजिटल कंटेंट की भी जांच कर रही है, जिनके जरिए शाही मस्जिद को लेकर गलत जानकारी फैलाए जाने का आरोप है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सामग्री सबसे पहले किस अकाउंट से पोस्ट हुई और बाद में किन-किन लोगों ने उसे आगे प्रसारित किया।
प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि सोशल मीडिया पर आने वाली किसी भी तस्वीर, वीडियो या संदेश को बिना पुष्टि के शेयर न करें। खासतौर पर संवेदनशील धार्मिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में अफवाहों से स्थिति और बिगड़ सकती है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में बड़े स्तर पर विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम चल रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने विकास कार्यों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने की भी चुनौती है। शाही मस्जिद से जुड़े विवाद के बाद पुलिस की नजर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सामग्री पर भी बनी हुई है। पुलिस FIR दर्ज कर पूरे मामले की जांच कर रही है। भ्रामक पोस्ट के स्रोत, उन्हें तैयार करने वाले लोगों और उन्हें आगे फैलाने वालों की भूमिका की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
























