भुवनेश्वर: चक्रवात ‘अर्णब’ ने ओडिशा के कई जिलों में दस्तक दी, लेकिन राज्य सरकार की पुख्ता तैयारियों के आगे उसका असर सीमित रहा। अब तक किसी की जान जाने की सूचना नहीं है। यानी सरकार ने शून्य जनहानि का जो लक्ष्य तय किया था, वह फिलहाल पूरा होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इसे महाप्रभु श्री जगन्नाथ की कृपा और प्रशासन की सतर्कता का नतीजा बताया। बुधवार शाम मुख्यमंत्री ने विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) के कंट्रोल रूम में चक्रवात की ताजा स्थिति और राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने पूरी जानकारी साझा की।
केंद्र और पड़ोसी राज्य से लगातार तालमेल
मुख्यमंत्री ने बताया कि चक्रवात आने से पहले और उसके दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई बार फोन पर उनसे बात की और तैयारियों का हाल पूछा। ओडिशा सरकार पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश की सरकार के साथ भी लगातार संपर्क में रही। उनके मुताबिक राज्य और जिला प्रशासन शुरू से अंत तक पूरी तरह चौकस रहा, इसीलिए प्रभावित इलाकों के लोगों को वक्त रहते सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा सका।
चक्रवात की मार झेलने वाले आठ जिलों में कुल 634 आश्रय स्थल खोले गए, जहां 43,827 लोगों को सुरक्षित रखा गया है। ये जिले हैं मलकानगिरी, कोरापुट, नबरंगपुर, रायगड़ा, कालाहांडी, गंजाम, गजपति और नुआपड़ा। राहत शिविरों में रह रहे लोगों के लिए पका हुआ भोजन, सूखा राशन, पीने का साफ पानी, दवाइयां और जरूरत का दूसरा सामान उपलब्ध कराया गया है, ताकि संकट की घड़ी में किसी को बुनियादी चीजों के लिए परेशान न होना पड़े।
313 टीमें मोर्चे पर, मंत्री और अफसर भी जिलों में
राहत और बचाव के लिए कुल 313 टीमें तैनात की गईं। इनमें ओड्राफ की 60, एनडीआरएफ की 9 और अग्निशमन सेवा की 244 टीमें शामिल हैं। जमीनी निगरानी के लिए सरकार ने दो उपमुख्यमंत्रियों, छह मंत्रियों और सात आईएएस अधिकारियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी थी, ताकि फैसले तुरंत लिए जा सकें।
गजपति में सबसे ज्यादा असर, पोटांगी में 188 मिमी बारिश
मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य के 17 ब्लॉकों में 105 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज हुई। कोरापुट जिले के पोटांगी में सबसे अधिक 188 मिलीमीटर पानी बरसा, जबकि गजपति जिले के मोहना में 182.4 मिलीमीटर बारिश हुई। बारिश का सबसे ज्यादा असर गजपति जिले पर पड़ा है। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने फोन पर तीन जिलों के प्रभारियों से बात की। इनमें कोरापुट के प्रभारी उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव, गजपति के प्रभारी मंत्री सूर्यवंशी सूरज और मलकानगिरी के प्रभारी मंत्री नित्यानंद गोंड शामिल हैं। उन्होंने बारिश की स्थिति, संभावित नुकसान, नदियों के जलस्तर और राहत शिविरों की सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।
2,245 गर्भवती महिलाएं अस्पताल पहुंचाई गईं, 931 बच्चों का जन्म
इस आपदा में सबसे संवेदनशील वर्ग का भी खास ख्याल रखा गया। चक्रवात के दौरान 2,245 गर्भवती महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाया गया। इसी अवधि में 931 बच्चों का जन्म हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने सभी जरूरी कदम पहले से उठा लिए थे। समुद्र में मछली पकड़ने गए लोगों को लौटाना किसी भी चक्रवात में सबसे बड़ी चुनौती होती है। इस बार गंजाम से बालेश्वर तक के तटीय इलाकों से 19,143 नौकाएं समुद्र में गई थीं। मुख्यमंत्री के मुताबिक सभी मछुआरे सकुशल तट पर लौट आए हैं और उन्हें वापस लाने में सरकार को सौ प्रतिशत सफलता मिली।
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खतरा घटा, पर निगरानी जारी
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि चक्रवात का खतरा कम होने के बावजूद प्रशासन ढील नहीं बरत रहा। लगातार हो रही बारिश से निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका है। इसे देखते हुए पर्याप्त संख्या में पंप लगाने और जल निकासी का काम तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। समीक्षा बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी, राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. अरविंद पाढ़ी और एसआरसी कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।



























