अयोध्या: रामजन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि से जुड़ी चोरी का मामला सामने आने के बाद अब इसकी जांच सिर्फ 4 जून की घटना तक सीमित नहीं रह गई है। ट्रस्ट की आंतरिक पड़ताल में सामने आई जानकारी से संकेत मिल रहे हैं कि चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी की शिकायत पहले भी सामने आ चुकी थी। इस पुराने मामले का जिक्र श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की डायरी में भी दर्ज बताया जा रहा है।

डायरी में दर्ज घटनाक्रम के मुताबिक, मंदिर परिसर में चढ़ावे की रकम की निगरानी और गणना से जुड़े काम के दौरान एक कर्मचारी पर चोरी का संदेह सामने आया था। इसके बाद उसे परिसर से हटा दिया गया था। यह कार्रवाई अप्रैल में हुई थी। बाद में 4 जून को चढ़ावे की राशि से जुड़ी चोरी का नया मामला सामने आया तो ट्रस्ट के स्तर पर पुराने घटनाक्रम की जानकारी भी दोबारा खंगाली गई।

4 जून की घटना के बाद खुलने लगी पुरानी कहानी

राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर 4 जून को सामने आई घटना ने ट्रस्ट की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। मामले की जानकारी सामने आने के बाद यह पता लगाने की कोशिश शुरू हुई कि कहीं इससे पहले भी चढ़ावे की रकम में किसी तरह की गड़बड़ी तो नहीं हुई थी। इसी दौरान ट्रस्ट के रिकॉर्ड और चंपत राय की निजी डायरी में दर्ज पुराने घटनाक्रम की जानकारी सामने आई।

डायरी में दर्ज विवरण से पता चलता है कि अप्रैल में ही एक युवक को चोरी के आरोप में मंदिर परिसर से हटाया गया था। इस पुराने मामले की जानकारी मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया। अब यह देखा जा रहा है कि अप्रैल में सामने आई घटना और जून में हुई चोरी के बीच कोई संबंध था या दोनों अलग-अलग घटनाएं थीं।

अप्रैल में कर्मचारी को परिसर से हटाया गया था

डायरी में दर्ज जानकारी के अनुसार, अप्रैल में एक युवक को मंदिर परिसर से हटाया गया था। उस पर चढ़ावे की रकम से जुड़ी चोरी का संदेह था। इसके बाद उससे पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान जांच से जुड़े लोगों ने उसके परिचित दो गणना कर्मियों को भी बुलाया। दोनों कर्मचारी अयोध्या के रहने वाले बताए गए हैं। उनसे युवक के बारे में अलग-अलग जानकारी ली गई।

यहीं से मामला और पेचीदा हो गया। दोनों गणना कर्मियों से अलग-अलग पूछताछ की गई तो उनके बयानों में कथित तौर पर बड़ा अंतर सामने आया। दोनों की ओर से दी गई जानकारी एक-दूसरे से मेल नहीं खा रही थी। इससे ट्रस्ट के स्तर पर संदेह और गहरा हुआ।

दो गणना कर्मियों के बयान में विरोधाभास

मंदिर में चढ़ावे की राशि की गणना का काम बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में गणना से जुड़े कर्मचारियों के बयान में विरोधाभास सामने आने के बाद पुराने मामले को गंभीरता से देखा गया। डायरी में दर्ज घटनाक्रम के मुताबिक, दोनों कर्मचारियों से अलग-अलग पूछताछ की गई थी।

उनसे यह जानने की कोशिश की गई कि संबंधित युवक से उनका क्या संपर्क था और मंदिर में चढ़ावे की राशि से जुड़े काम के दौरान उनकी क्या भूमिका रही थी। पूछताछ में सामने आए विरोधाभासी बयानों ने कई सवाल खड़े किए। हालांकि, इन बयानों से अपने आप किसी कर्मचारी की भूमिका साबित नहीं होती। किसी व्यक्ति पर आरोप तय करने के लिए जांच और ठोस साक्ष्यों की जरूरत होगी।

क्या पहले से चल रहा था चढ़ावे में गड़बड़ी का खेल?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राम मंदिर के चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी सिर्फ एक-दो घटनाओं तक सीमित थी या लंबे समय से ऐसी कोशिशें होती रही थीं? चंपत राय की डायरी में दर्ज अप्रैल की घटना ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है। 4 जून की घटना के बाद जब पुराने मामले की जानकारी सामने आई तो जांच करने वालों का ध्यान मंदिर में चढ़ावे की रकम की पूरी प्रक्रिया पर गया। रकम किस तरह जमा होती है, उसकी गणना कौन करता है, रिकॉर्ड कैसे तैयार किया जाता है और पैसा सुरक्षित स्थान तक किस प्रक्रिया से पहुंचता है, इन सभी पहलुओं को जांच के दायरे में देखा जा सकता है।

चढ़ावे की रकम की पूरी प्रक्रिया पर उठे सवाल

राम मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। भक्त भगवान राम के दर्शन के साथ अपनी श्रद्धा के अनुसार दान और चढ़ावा भी अर्पित करते हैं। ऐसे में चढ़ावे की रकम की सुरक्षा और उसके हिसाब-किताब की जिम्मेदारी काफी संवेदनशील है। अगर किसी स्तर पर रकम में अंतर मिलता है तो यह सिर्फ आर्थिक नुकसान का मामला नहीं रह जाता, बल्कि मंदिर की व्यवस्था और कर्मचारियों की निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है। पुराने मामले के सामने आने के बाद अब यह भी देखा जा रहा है कि उस समय क्या कार्रवाई हुई थी और क्या उसके बाद व्यवस्था में कोई बदलाव किया गया था।

पुराने मामले में क्या कार्रवाई हुई थी?

डायरी में दर्ज जानकारी के अनुसार, अप्रैल में जिस युवक पर चोरी का आरोप लगा था, उसे मंदिर परिसर से हटा दिया गया था। हालांकि, पुराने मामले में आगे क्या विस्तृत कार्रवाई हुई, इसका पूरा विवरण जांच के दौरान सामने आना बाकी है। यही वजह है कि 4 जून की घटना के बाद अप्रैल वाले प्रकरण की जानकारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश हो सकती है कि उस समय चोरी की घटना किस स्तर तक सामने आई थी और उसे लेकर क्या कदम उठाए गए थे।

डायरी बनी जांच की अहम कड़ी

चंपत राय की डायरी में घटनाओं का दर्ज होना इस पूरे मामले में इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें पुराने घटनाक्रम का रिकॉर्ड मौजूद बताया जा रहा है। डायरी में दर्ज तारीखों और घटनाओं के आधार पर यह समझने में मदद मिल सकती है कि अप्रैल में सामने आई घटना के बाद क्या कदम उठाए गए थे। साथ ही 4 जून की घटना के बाद पुराने मामले को किस तरह दोबारा देखा गया। जांच के लिहाज से ऐसे रिकॉर्ड यह पता लगाने में मदद कर सकते हैं कि अलग-अलग घटनाओं के बीच कोई कड़ी थी या नहीं।

जांच का दायरा बढ़ने की संभावना

अब जांच सिर्फ उस रकम या उस दिन की घटना तक सीमित रहने के बजाय मंदिर की चढ़ावा व्यवस्था की पिछली अवधि तक जा सकती है। रिकॉर्ड, गणना से जुड़े दस्तावेज, कर्मचारियों की ड्यूटी और पुराने मामलों की जानकारी को मिलाकर देखा जा सकता है। अगर पुराने और नए मामलों के बीच कोई समानता सामने आती है तो जांच और आगे बढ़ सकती है। वहीं, अगर दोनों घटनाएं अलग-अलग पाई जाती हैं तो जिम्मेदार लोगों की भूमिका अलग-अलग तय होगी।

आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी

इस पूरे मामले में एक बात साफ है कि डायरी में दर्ज किसी घटना या पूछताछ के दौरान सामने आए विरोधाभासी बयानों को सीधे अपराध साबित करने वाला साक्ष्य नहीं माना जा सकता। किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी, यह जांच में उपलब्ध ठोस सबूतों के आधार पर ही तय होगा।

फिलहाल सामने आई जानकारी ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सिर्फ 4 जून की घटना तक सीमित नहीं दिख रहा है। अप्रैल में सामने आई पुरानी घटना और उस दौरान हुई पूछताछ ने जांच के सामने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाह इस बात पर है कि पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा जांच को जोड़ने के बाद ट्रस्ट और संबंधित जांच एजेंसियों के सामने क्या नई जानकारी आती है और चढ़ावे की राशि की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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