लगातार बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण बाराबंकी में सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। नदी अब खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। एल्गिन ब्रिज पर सोमवार सुबह आठ बजे सरयू का जलस्तर 106.420 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां खतरे का निशान 106.070 मीटर है। यानी नदी का पानी खतरे के निशान से करीब 35 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका है।

सरयू के बढ़ते जलस्तर ने जिले के तराई क्षेत्र में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब 60 गांव बाढ़ और नदी की कटान से प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई जगहों पर रास्तों पर पानी भर गया है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हुआ है। कचनापुर-हेतमापुर मार्ग पर पानी भरने के कारण रास्ते पर आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है।

बैराजों से छोड़ा गया करीब 3.78 लाख क्यूसेक पानी

सरयू नदी में जलस्तर बढ़ने की एक बड़ी वजह बैराजों से छोड़ा गया पानी भी है। गिरिजा, शारदा और सरयू बैराज से नदी में करीब 3,78,800 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसका असर बाराबंकी के निचले इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। पानी बढ़ने के साथ ही नदी के किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा और गहरा गया है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है। कई परिवार अपने घर छोड़कर तटबंधों और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।

23 हजार से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित

प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, जिले में बाढ़ से करीब 23,865 लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ की चपेट में आने वाले परिवारों की संख्या करीब 5,450 बताई गई है। अब तक लगभग 12 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा चुका है। बाढ़ का असर सिर्फ आबादी तक सीमित नहीं है। बड़ी मात्रा में कृषि भूमि भी पानी की चपेट में आई है। जिले में कुल करीब 4,575.549 हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुआ है। इसमें लगभग 1,505.431 हेक्टेयर कृषि योग्य जमीन शामिल है। वहीं नदी की कटान से करीब 14,431 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित बताया गया है।

इन गांवों में बढ़ी परेशानी

सरयू के बढ़ते पानी का असर मदरहा, बल्लीपुर, पर्वतपुर, सुबेदारपुरवा, कोटारी गौरिया, चौसीपुरवा, गायघाट, बतनेरो, कलहंसपुरवा, गोबरहा, सनवा, अकोना, सरसंडा, टेपरा, भैरोकोल, परसावल, गेदरापुर, सराय, सुरजन, लोढ़मऊ, अतरौली, कसमौली और हौसिंगपुर समेत कई गांवों में दिखाई दे रहा है।

सिरौलीगौसपुर, करोंनी, कोटदरपुरवा, गोड़ियनपुरवा, पवक्कपुरवा, पुनौली, लोनियनपुरवा, कंगन पुरवा, मजरे डेमा, सहाइंपुरवा, डेमा, असवा, मुखियनपुरवा, जलालपुर तराई, खेता सराय, सैलाब, बसंतापुर, पांडेय पुरवा, सिकरी, जीवन और अतरसुइया में भी बाढ़ का असर है। इसके साथ ही ककरहा, उमरहरा, चिरा, बेलहरी, बाबा पुरवा, केदारीपुर, बलाईपुर और हेतमापुर समेत अन्य गांव भी प्रभावित हैं। सुंदरनगर का कबापुरवा और कचनापुर-हेतमापुर मार्ग से जुड़े गांवों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

तटबंध पर रहने को मजबूर हुए परिवार

बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ कई परिवारों के सामने घर छोड़कर सुरक्षित जगह पर जाने की मजबूरी पैदा हो गई है। बेलहरी, बाबा पुरवा, केदारीपुर और बलाईपुर के करीब 100 परिवार तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी लगातार बढ़ रहा है और ऐसे में घरों में रहना जोखिम भरा हो गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ कटान भी तेज हो सकती है। नदी किनारे की जमीन लगातार कटने से खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों पर खतरा बना हुआ है।

फतेहपुर में 38 मिलीमीटर बारिश

बाराबंकी में बारिश का दौर भी जारी है। तहसील नवाबगंज में करीब तीन मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि फतेहपुर में 38 मिलीमीटर बारिश हुई। हैदरगढ़, रामनगर और सिरौलीगौसपुर में हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई है। बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण सरयू के जलस्तर पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में नदी के आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को आने वाले समय में और सतर्क रहने की जरूरत है।

रास्ते बंद, रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित

बाढ़ का पानी सड़कों और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर पहुंचने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है। कचनापुर-हेतमापुर मार्ग पर पानी भरने के बाद आवागमन ठप हो गया है। इससे आसपास के गांवों के लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन परिवारों को है, जिनका घर या खेत नदी के बेहद करीब है। पानी बढ़ने के साथ पशुओं के लिए चारा, पीने के पानी और दूसरी जरूरी चीजों की व्यवस्था भी चुनौती बन रही है।

प्रशासन की बढ़ी निगरानी

सरयू के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। तटबंधों और संवेदनशील इलाकों पर भी नजर रखी जा रही है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर नदी का जलस्तर और बढ़ता है तो बाढ़ का दायरा और बढ़ सकता है। नदी किनारे बसे गांवों में लोगों की निगाहें लगातार सरयू के जलस्तर पर टिकी हुई हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि पानी जल्द घटेगा और उन्हें राहत मिलेगी, लेकिन फिलहाल बाढ़ का संकट टला नहीं है।

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