अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने देवरिया में आरक्षण और पिछड़े वर्गों को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। जिला स्तरीय कार्यकर्ता समागम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही कुछ राजनीतिक दलों को अचानक आरक्षण और पिछड़े समाज की याद आने लगती है।

उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसे नारों और दावों से प्रभावित होने के बजाय यह सवाल पूछना चाहिए कि चुनाव से ठीक पहले ही आरक्षण का मुद्दा क्यों उठाया जाता है। शहर के टाउनहाल स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यकर्ता समागम में अनुप्रिया पटेल ने कहा कि आरक्षण कोई राजनीतिक दल की देन नहीं है, बल्कि यह भारतीय संविधान से मिला अधिकार है।

संविधान ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े, दलित, वंचित और लंबे समय तक भेदभाव का सामना करने वाले वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि आरक्षण को लेकर समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि जब तक समाज में बराबरी पूरी तरह स्थापित नहीं हो जाती, तब तक उन वर्गों के लिए संवैधानिक सुरक्षा और अवसर जरूरी हैं, जिन्हें लंबे समय तक सामाजिक और आर्थिक रूप से पीछे रखा गया।

‘सत्ता से बाहर होते ही पिछड़ों की याद आती है’

अनुप्रिया पटेल ने PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक की राजनीति को लेकर भी विपक्ष पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को सत्ता से बाहर होते ही पिछड़े और वंचित समाज की चिंता सताने लगती है। चुनाव के समय आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया जाता है, लेकिन जनता को यह देखना चाहिए कि सत्ता में रहते हुए इन वर्गों के लिए वास्तव में क्या काम किया गया।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि राजनीतिक नारों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय जनता के बीच जाकर तथ्यों के साथ बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के अलग-अलग वर्गों को यह समझने की जरूरत है कि आरक्षण की व्यवस्था क्यों बनाई गई और आज भी इसकी जरूरत क्यों महसूस होती है।

‘आरक्षण कोई खैरात या भीख नहीं’

अपना दल (एस) की अध्यक्ष ने कहा कि आरक्षण को खैरात या भीख के तौर पर पेश करना गलत है। यह संविधान में दी गई व्यवस्था है, जिसका मकसद उन समुदायों को बराबरी का अवसर देना है जो लंबे समय तक सामाजिक भेदभाव और अवसरों की कमी से जूझते रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है, लेकिन केवल कानूनी बराबरी से सामाजिक असमानता खत्म नहीं हो जाती। जब तक शिक्षा, रोजगार और सामाजिक प्रतिनिधित्व में वास्तविक समानता नहीं आती, तब तक पिछड़े और वंचित वर्गों के लिए विशेष अवसरों की जरूरत बनी रहेगी।

आर्थिक आधार पर आरक्षण का भी किया जिक्र

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने आरक्षण के दायरे में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को भी शामिल करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि आज आरक्षण की व्यवस्था अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों वाले वर्गों तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय यह देखना चाहिए कि जिन वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी, उनकी वास्तविक स्थिति क्या है। केवल चुनाव के समय आरक्षण का मुद्दा उठाने से सामाजिक असमानता दूर नहीं होगी।

‘क्या सरकारी नौकरियों का बैकलॉग पूरा हो गया?’

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अनुप्रिया पटेल ने आरक्षण को लेकर कई सवाल भी सामने रखे। उन्होंने कहा कि जो लोग आरक्षण पर सवाल उठाते हैं या इसे लेकर भ्रम फैलाते हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए कि क्या समाज में भेदभाव पूरी तरह खत्म हो चुका है? उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकारी नौकरियों में आरक्षित वर्गों का बैकलॉग पूरी तरह भर गया है? क्या सरकारी और उच्च शिक्षण संस्थानों में पिछड़े, दलित और वंचित समाज के बच्चे अपनी आबादी के अनुपात में पहुंच चुके हैं?

अगर इन सवालों का जवाब अभी ‘नहीं’ है तो यह साफ है कि सामाजिक बराबरी की मंजिल अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुई है। अनुप्रिया पटेल ने कहा कि आरक्षण को सिर्फ चुनावी मुद्दे के तौर पर देखने के बजाय इसे सामाजिक न्याय के नजरिए से समझना चाहिए। उनके मुताबिक, जब तक अवसरों और प्रतिनिधित्व में असमानता बनी हुई है, तब तक इस व्यवस्था पर चर्चा भी होती रहेगी।

कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों का संदेश

जिला स्तरीय कार्यकर्ता समागम के दौरान अनुप्रिया पटेल ने संगठन को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक संगठन की ताकत उसके कार्यकर्ता होते हैं और चुनाव के समय उनकी भूमिका और बढ़ जाती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे जनता के बीच जाकर सरकार की योजनाओं और नीतियों की जानकारी दें और लोगों की समस्याओं को भी गंभीरता से सुनें। उन्होंने कहा कि राजनीति केवल चुनाव के समय जनता के बीच जाने का नाम नहीं है, बल्कि लगातार लोगों के साथ जुड़े रहना जरूरी है।

‘देश संविधान से चलेगा’

अनुप्रिया पटेल ने अपने संबोधन में संविधान की भूमिका को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश संविधान के अनुसार चलेगा और संविधान से मिले अधिकारों के साथ किसी तरह का खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आरक्षण को लेकर समाज में किसी तरह का डर या भ्रम पैदा करने की जरूरत नहीं है। संवैधानिक व्यवस्था को समझना और उसके आधार पर आगे बढ़ना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत है।

देवरिया में अनुप्रिया पटेल का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को लेकर राजनीतिक दलों के बीच खींचतान लगातार चर्चा में रहती है। ऐसे में आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर उनकी टिप्पणी को आगामी राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

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