Gorakhpur: लोगों में रेबीज फैलने की अफवाह से हड़कंप मच गया है। गोरखपुर में एक गाय की मौत के बाद लोगों में रेबीज वायरस का डर देखा जा रहा है। हालांकि बड़ी संख्या में लोगों ने सरकारी अस्पताल पहुंचकर रेबीज वेक्सीन का टीका लगवाया है। बताया जा रहा है कि एक गाय को कुत्ते ने काट लिया था। कुछ दिनों के बाद गाय की मौत हो गई। लोगों का कहना है कि इसी गाय के दूध से चरणामृत बनाकर लोगों को दिया गया था।
यह है पूरा मामला
एक गाय की मौत के बाद गांव में दहशत का माहौल है। बताया जा रहा है कि जिस गाय को कुत्ते ने काटा था, उसी के दूध से दुर्गा पूजा के दौरान चरणामृत तैयार किया गया था। गाय की तबीयत बिगड़ने और फिर उसकी मौत की खबर सामने आने के बाद चरणामृत पीने वाले ग्रामीणों में रेबीज को लेकर चिंता बढ़ गई। मामला गोला ब्लॉक के डाड़ी खास गांव का है, जहां एहतियातन करीब 450 लोगों ने एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाई है। मंगलवार को 50 लोगों ने सीएचसी पहुंचकर टीका लगवाया, जबकि बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में कैंप लगाकर करीब 400 लोगों का टीकाकरण किया। हालांकि, क्या चरणामृत पीने से रेबीज का खतरा था? इस पर स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेश कुमार ने क्या जानकारी दी, देखिए ये रिपोर्ट।
दुर्गापूजा में बांटा गया चरणामृत
गोरखपुर के डाड़ी खास गांव में दुर्गा पूजा के दौरान वितरित चरणामृत को लेकर लोगों में चिंता फैल गई। दरअसल, जिस गाय के दूध से चरणामृत बनाया गया था, उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। पशुपालक के मुताबिक, गाय को आवारा कुत्ते ने काटा था। पशु चिकित्सकों ने भी गाय में रेबीज की आशंका जताई थी।
गाय की मौत की जानकारी सामने आने के बाद डाड़ी खास और गोविंदपुर गांव के लोग चिंतित हो गए। बताया जा रहा है कि गाय का दूध कुछ दुकानों और घरों में भी पहुंचता था। ऐसे में लोगों ने एहतियातन एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी शुरू कर दी।
450 लोगों ने लगवाया टीका
मंगलवार को 50 लोगों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर टीका लगवाया, जबकि बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में कैंप लगाकर करीब 400 लोगों का टीकाकरण किया। इस तरह कुल 450 लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई। इस मामले में डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि उन्हें मिली जानकारी के अनुसार, चरणामृत बनाने से पहले दूध उबाला गया था। हालांकि, रेबीज के संभावित जोखिम का आकलन चिकित्सकीय विशेषज्ञों द्वारा किया जाना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग की सलाह है कि संबंधित लोग स्वयं कोई निष्कर्ष निकालने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लें।
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