गोरखपुर पुलिसकर्मियों के व्यवहार और संवाद कौशल को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह, रामगढ़ताल में आयोजित इस परिक्षेत्र स्तरीय कार्यशाला में गोरखपुर सहित महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया जिलों के 500 से अधिक पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान पुलिसकर्मियों को बिहेवियरल, कम्युनिकेशन और सॉफ्ट स्किल्स से जुड़े विशेष प्रशिक्षण दिए गए, ताकि वे आम जनता के साथ अपने व्यवहार और संवाद को और अधिक प्रभावी बना सकें।
एसपी सिटी, निमिष पाटिल ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों में बेहतर व्यवहार, प्रभावी संवाद कौशल और जनसामान्य के साथ सकारात्मक संबंध विकसित करना रहा। पुलिस और जनता के बीच भरोसे का रिश्ता किसी भी थाने या क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने की सबसे बड़ी कड़ी होता है। ऐसे में जरूरी है कि पुलिसकर्मी न केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने में दक्ष हों, बल्कि आम नागरिकों से बातचीत करते समय संयम, विनम्रता और स्पष्टता का भी परिचय दें। प्रशिक्षकों ने बताया कि थाने या चौकी पर आने वाले हर फरियादी के साथ सम्मानजनक व्यवहार पुलिस की छवि को और सशक्त बनाता है।
कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को अनुशासन और सेवाभाव जैसे मूल्यों की भी बारीकी से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने इस बात पर जोर दिया कि पुलिसिंग केवल कानून लागू करने का कार्य नहीं है, बल्कि यह जनसेवा का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके साथ ही सांस्कृतिक संवेदनशीलता यानी अलग-अलग सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोगों के साथ व्यवहार करते समय संवेदनशील और सम्मानजनक रवैया अपनाने के गुर भी सिखाए गए। प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि किस तरह छोटी-छोटी बातें, जैसे बोलने का लहजा, सुनने का धैर्य और शारीरिक भाषा, पुलिस और आम नागरिक के बीच संवाद को प्रभावित करती हैं।
वर्कशॉप के दौरान ट्रस्ट बिल्डिंग यानी विश्वास निर्माण पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। प्रशिक्षकों ने समझाया कि जब पुलिसकर्मी संवाद में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखते हैं, तो इससे जनता का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। यह भी बताया गया कि भरोसे का यह रिश्ता अपराध नियंत्रण, सूचना संकलन और सामुदायिक सहयोग जैसी गतिविधियों में भी सीधे तौर पर मददगार साबित होता है। प्रशिक्षण के दौरान वास्तविक घटनाओं और उदाहरणों के जरिए यह भी समझाया गया कि कैसे संवाद की छोटी चूक बड़े विवाद का रूप ले सकती है, वहीं संयमित और स्पष्ट संवाद बड़ी समस्याओं को भी शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा सकता है।
पुलिस की नौकरी को देश की सबसे तनावपूर्ण सेवाओं में गिना जाता है, ऐसे में इस कार्यशाला में स्ट्रेस मैनेजमेंट यानी तनाव प्रबंधन और इमोशनल वेलबीइंग यानी भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने पुलिसकर्मियों को बताया कि लगातार तनावपूर्ण परिस्थितियों में काम करने के बावजूद मानसिक संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। इसके लिए सांस लेने की तकनीकों, समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच जैसे व्यावहारिक उपाय भी साझा किए गए। प्रशिक्षकों ने यह भी बताया कि जब कोई पुलिसकर्मी खुद मानसिक रूप से संतुलित और तनावमुक्त होता है, तभी वह ड्यूटी के दौरान जनता के साथ धैर्यपूर्वक और प्रभावी ढंग से संवाद कर पाता है।
रिपोर्ट- सोनू सिंह
