लखनऊ। वक्फ संपत्तियों के डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, उम्मीद सेंट्रल पोर्टल-2025 पर देशभर में अब तक 7.99 लाख वक्फ संपत्तियों का विवरण दर्ज किया जा चुका है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश का है, जहां 1.52 लाख वक्फ संपत्तियों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है।

उत्तर प्रदेश के बाद पश्चिम बंगाल का स्थान है, जहां 1.31 लाख वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। देश में वक्फ संपत्तियों के डिजिटल पंजीकरण में यूपी की बड़ी हिस्सेदारी राज्य में मौजूद वक्फ संपत्तियों के व्यापक नेटवर्क को भी दर्शाती है।

यूपी में वक्फ संपत्तियों का क्यों है बड़ा महत्व?
उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियां धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के संचालन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इन संपत्तियों में मस्जिद, मदरसे, कब्रिस्तान, दरगाह और अन्य धार्मिक-सामुदायिक उपयोग की जमीन व इमारतें शामिल हो सकती हैं। कई स्थानों पर इन संपत्तियों से होने वाली आय का इस्तेमाल धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ समुदाय से जुड़े सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों में किया जाता है।

यूपी जैसे बड़े और आबादी वाले राज्य में वक्फ संपत्तियों का सही रिकॉर्ड इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़ी संख्या में संपत्तियों के प्रबंधन, उपयोग और संरक्षण से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। डिजिटल रिकॉर्ड बनने से संपत्तियों की पहचान और उनके दस्तावेजी विवरण को एक केंद्रीकृत व्यवस्था में लाने में मदद मिल सकती है। इससे प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने और संपत्तियों से जुड़े विवादों की निगरानी को भी बेहतर करने की उम्मीद है।

यूपी में सबसे ज्यादा वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड
उम्मीद सेंट्रल पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों की जानकारी अपलोड करने की प्रक्रिया पिछले साल शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ उनके प्रबंधन और प्रशासन में पारदर्शिता लाना है।
देश के अन्य राज्यों की बात करें तो केरल में 79,929, महाराष्ट्र में 71,947, तेलंगाना में 63,982 और कर्नाटक में 58,846 वक्फ संपत्तियों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज की गई है। दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से 3,233 संपत्तियों का विवरण अपलोड किया जा चुका है।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा संपत्तियां वापस
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वक्फ बनाने वालों को संपत्तियां वापस किए जाने के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है। वहां अब तक 9,292 संपत्तियां वापस की गई हैं। केरल में 4,418 और गुजरात में 3,198 वक्फ संपत्तियां वापस की जा चुकी हैं।
वहीं, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में 7 अगस्त तक सबसे कम, सिर्फ दो वक्फ संपत्तियां पोर्टल पर दर्ज की गई थीं।

2025 में लॉन्च हुआ था उम्मीद पोर्टल
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में बताया था कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत संशोधित प्रावधानों के अनुरूप उम्मीद सेंट्रल पोर्टल-2025 तैयार किया गया है। इसे 6 जून 2025 को लॉन्च किया गया था। पोर्टल का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का विवरण ऑनलाइन दर्ज करने, नए वक्फ के पंजीकरण और संपत्तियों के समग्र प्रबंधन एवं प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाना है।

यूपी के लिए डिजिटल रिकॉर्ड क्यों अहम?
उत्तर प्रदेश में 1.52 लाख वक्फ संपत्तियों का पोर्टल पर दर्ज होना इसलिए अहम है, क्योंकि राज्य में वक्फ संपत्तियों की संख्या देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक है। इतने बड़े स्तर पर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से संपत्तियों से संबंधित जानकारी एक केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। आने वाले समय में यह रिकॉर्ड वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, संरक्षण, उपयोग और प्रशासन को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, डिजिटल पंजीकरण के साथ इन संपत्तियों के सही दस्तावेज, स्वामित्व/वक्फ स्थिति और जमीनी रिकॉर्ड का सत्यापन भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

1.52 लाख संपत्तियों के आंकड़े के साथ उत्तर प्रदेश उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के डिजिटल पंजीकरण में देश में सबसे आगे है। ऐसे में यूपी में इस पोर्टल पर दर्ज होने वाला डेटा न केवल राज्य बल्कि देश में वक्फ संपत्तियों के भविष्य के प्रबंधन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

(फरमान अब्बास मन्जुल)

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