उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) तक पहुंच गई है। ‘हर घर नल से जल’ योजना के तहत तैयार कराई गईं और बाद में खराब पाई गईं पानी की टंकियों को लेकर ईडी ने जांच का दायरा बढ़ाया है। एजेंसी ने टंकियों की मंजूरी से लेकर उनके निर्माण और भुगतान तक का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। ईडी ने जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक को एक विस्तृत प्रारूप भेजकर हर टंकी से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। बताया जा रहा है कि इस प्रारूप में करीब 20 अलग-अलग कॉलम हैं। इनमें टंकी को मंजूरी मिलने से लेकर भुगतान किए जाने तक की पूरी प्रक्रिया का ब्योरा मांगा गया है।
जांच एजेंसी की ओर से मांगी गई जानकारी में प्रत्येक टंकी से जुड़े दस्तावेज और वित्तीय प्रक्रिया का विवरण शामिल है। यानी किस टंकी को कब मंजूरी मिली, निर्माण किस तरह कराया गया, इसके लिए कितना भुगतान हुआ और भुगतान किस स्तर पर किया गया, इन सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है। जल निगम (ग्रामीण) की ओर से यह पूरा रिकॉर्ड ईडी को उपलब्ध नहीं कराया गया है। रिकॉर्ड मिलने के बाद एजेंसी इसके आधार पर आगे की जांच कर सकती है।
इस मामले में सिर्फ निर्माण कार्य और भुगतान की प्रक्रिया ही जांच के दायरे में नहीं है। 2021 के बाद जल निगम (ग्रामीण) में तैनात रहे करीब आधा दर्जन आईएएस अधिकारियों के कार्यकाल से जुड़े कामकाज को भी जांच के दायरे में रखा गया है। बताया गया है कि संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान योजना के तहत लिए गए फैसलों और हुए कामों से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जा रही है। इस दौरान टंकियों की मंजूरी, निर्माण प्रक्रिया और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। किसी अधिकारी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
जल निगम के कामकाज में वर्ष 2021 में बड़ा बदलाव हुआ था। इसी दौरान जल निगम को ग्रामीण और नगरीय हिस्सों में विभाजित किया गया था। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्र में जलापूर्ति से जुड़े काम जल निगम (ग्रामीण) के तहत आने लगे। जल जीवन मिशन के तहत गांवों में घर-घर पाइपलाइन के जरिए पेयजल पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर काम हुआ। योजना के तहत पानी की टंकियों का निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन देने जैसे काम किए गए। अब इन्हीं कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
जांच का एक प्रमुख हिस्सा उन पानी की टंकियों से जुड़ा है, जिन्हें निर्माण के बाद खराब या मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। ईडी यह जानने की कोशिश कर रही है कि ऐसी टंकियों को मंजूरी किस आधार पर दी गई और निर्माण पूरा होने के बाद उनके लिए भुगतान की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी। जांच में यह भी देखा जा सकता है कि काम की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई और संबंधित अधिकारियों या एजेंसियों की ओर से किस तरह की रिपोर्ट तैयार की गई थी।
ईडी की ओर से मांगे गए 20 कॉलम वाले प्रारूप से साफ है कि जांच सिर्फ किसी एक चरण तक सीमित नहीं है। एजेंसी मंजूरी, निर्माण, निरीक्षण और भुगतान की पूरी प्रक्रिया को एक साथ देखकर रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। इसमें यह भी देखा जाएगा कि जिस काम के लिए सरकारी धन जारी किया गया, वह काम जमीन पर किस स्थिति में था और उसके बाद भुगतान किस प्रक्रिया के तहत किया गया। ईडी को जल निगम (ग्रामीण) की ओर से मांगा गया पूरा विवरण उपलब्ध कराया जाना बाकी है। रिकॉर्ड मिलने के बाद जांच में आगे और नाम या दस्तावेज सामने आ सकते हैं।
जल जीवन मिशन ग्रामीण इलाकों में घर-घर नल से पानी पहुंचाने की केंद्र और राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है। ऐसे में योजना से जुड़े निर्माण कार्यों और सरकारी भुगतान में कथित गड़बड़ियों की जांच को गंभीरता से देखा जा रहा है। अभी जांच शुरुआती स्तर पर है और संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल को दायरे में लेने का मतलब अपने आप में किसी अधिकारी पर आरोप सिद्ध होना नहीं है। ईडी की जांच में सामने आने वाले दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड ही यह स्पष्ट करेंगे कि योजना के तहत कहां और किस स्तर पर अनियमितता हुई।
























