राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का पानी लगातार ऊपर चढ़ रहा है और इसका असर नदी किनारे बसी कॉलोनियों में साफ दिखने लगा है। एमार गोमती ग्रीन्स और आसपास की आवासीय सोसाइटियों के लोग इन दिनों खासे चिंतित हैं। उन्हें डर है कि अगर जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। निवासियों की सबसे बड़ी फिक्र परिसर के पास स्थित इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन को लेकर है। अगर इसमें पानी भर गया, तो सोसाइटी के साथ-साथ आसपास के इलाकों की बिजली आपूर्ति भी ठप हो सकती है। बिजली जाने का मतलब है पानी की सप्लाई, लिफ्ट, इंटरनेट और रोजमर्रा की कई जरूरी सुविधाओं का रुक जाना। इसकी सबसे ज्यादा मार बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों पर पड़ती है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए एमार गोमती ग्रीन्स रेजिडेंट्स एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, नगर निगम और विद्युत विभाग को पत्र भेजकर तुरंत ध्यान देने की मांग की है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि इस पत्र का उद्देश्य लोगों में घबराहट फैलाना नहीं, बल्कि खतरे को बढ़ने से पहले ही संभालना है। उनके मुताबिक समय रहते उठाए गए कदम बाद में होने वाले बड़े नुकसान से बचा सकते हैं। आरडब्ल्यूए ने प्रशासन के सामने कई ठोस मांगें रखी हैं। सबसे पहले, गोमती नदी के जलस्तर की निरंतर निगरानी की जाए, ताकि हर बदलाव की जानकारी समय पर मिलती रहे। दूसरे, सब-स्टेशन को पानी से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं, क्योंकि यही इलाके की बिजली व्यवस्था की रीढ़ है।
इसके अलावा, संभावित जलभराव से निपटने के लिए क्षेत्र में पंप, जनरेटर और अन्य राहत एवं बचाव उपकरण पहले से तैनात करने की मांग की गई है। एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि आपदा प्रबंधन टीमों के आपातकालीन नंबर सभी निवासियों को उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही, जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक स्पष्ट और व्यवहारिक निकासी योजना भी तैयार रखी जाए। आरडब्ल्यूए ने इलाके के सभी लोगों से शांति और धैर्य बनाए रखने का आग्रह किया है। संकट की घड़ी में सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर अफवाहें तेजी से फैलती हैं, जो हालात को और बिगाड़ सकती हैं। इसलिए एसोसिएशन ने कहा है कि लोग सिर्फ आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और बिना पुष्टि वाली खबरें आगे न बढ़ाएं।
बरसात के मौसम में नदियों का जलस्तर बढ़ना कोई नई बात नहीं है, लेकिन नदी के करीब बसी घनी आबादी वाली सोसाइटियों के लिए यह हमेशा चिंता का विषय रहता है। जानकारों का मानना है कि ऐसे इलाकों में बिजली, पानी और निकासी जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं की सुरक्षा पर पहले से ध्यान देना बेहद जरूरी है। फिलहाल निवासियों की निगाहें प्रशासन के जवाब पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि संबंधित विभाग जल्द ही स्थिति का जायजा लेकर जरूरी कदम उठाएंगे, ताकि किसी भी अनहोनी को टाला जा सके।
























