लखनऊ: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का शुक्रवार रात निधन हो गया। उन्होंने लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में अंतिम सांस ली। वह पिछले कई दिनों से अस्पताल के पोस्टऑपरेटिव आईसीयू में भर्ती थे और उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। उनके निधन की खबर सामने आते ही समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। एसजीपीजीआई के निदेशक डॉ. आरके धीमन ने रामगोविंद चौधरी के निधन की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि चौधरी का संस्थान में उपचार चल रहा था। उन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप समेत कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां थीं। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा था।
रामगोविंद चौधरी की तबीयत पिछले कुछ समय से खराब चल रही थी। हालत गंभीर होने के बाद उन्हें एसजीपीजीआई लाया गया था। यहां उन्हें पोस्टऑपरेटिव आईसीयू में रखा गया था। डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए थे, लेकिन शुक्रवार रात उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका और उनका निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी मिलते ही परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और करीबी लोगों का अस्पताल पहुंचना शुरू हो गया। कुछ ही देर में एसजीपीजीआई परिसर में सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की भी भीड़ जुटने लगी। पार्टी से जुड़े लोगों के बीच उनके निधन की खबर से शोक का माहौल बन गया।
रामगोविंद चौधरी उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के प्रमुख और अनुभवी नेताओं में शामिल रहे। उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली थी। लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान वह पार्टी के महत्वपूर्ण फैसलों और विधानसभा में विपक्ष की आवाज को मजबूती से उठाने के लिए जाने जाते रहे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहते हुए उन्होंने प्रदेश सरकार की नीतियों और विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष की ओर से अपनी बात रखी। सदन में उनके भाषण और राजनीतिक हस्तक्षेप अक्सर चर्चा में रहे। पार्टी के भीतर भी उन्हें वरिष्ठ नेताओं में गिना जाता था।
रामगोविंद चौधरी के निधन की खबर सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शोक जताना शुरू कर दिया। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और पार्टी के प्रति योगदान को याद करते हुए नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी एसजीपीजीआई में भी उनके परिचितों, समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के पहुंचने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। अस्पताल में मौजूद परिवार के लोगों के बीच भी माहौल गमगीन रहा। रामगोविंद चौधरी के निधन को समाजवादी पार्टी के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने संगठन और विधानसभा, दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनके निधन से पार्टी ने अपने एक अनुभवी नेता को खो दिया है।
























