लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और तैनाती की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। अब आउटसोर्सिंग के जरिए काम करने वाले कर्मचारियों की पहचान और उनके रिकॉर्ड को एक व्यवस्थित प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) के तहत हर आउटसोर्स कर्मचारी और संबंधित विभाग को अलग-अलग यूनिक कोड दिए जाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे कर्मचारी की भर्ती से लेकर उसकी तैनाती और संबंधित विभाग की जानकारी को एक ही रिकॉर्ड सिस्टम में रखा जा सकेगा।
नई व्यवस्था का मकसद आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और अनियमितताओं पर नजर रखना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि जिस पद के लिए अभ्यर्थी का चयन किया जा रहा है, उसके लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता और अन्य जरूरी मानकों को वह पूरा करता हो। इसके लिए अभ्यर्थियों के दस्तावेजों और योग्यता का प्रशासनिक स्तर पर सत्यापन कराया जाएगा।
तीन स्तर पर होगी निगरानी
आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और तैनाती की पूरी प्रक्रिया की निगरानी तीन स्तर पर किए जाने का प्रावधान है। इसमें शासन या निदेशालय स्तर के साथ-साथ मंडल और जिला स्तर पर भी समितियां काम करेंगी। शासन या निदेशालय स्तर पर संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। इसमें विभागाध्यक्ष या संबंधित संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की भी भूमिका रहेगी। यह समिति पूरी व्यवस्था की निगरानी और जरूरी दिशा-निर्देश देने का काम करेगी।
मंडल स्तर पर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी। यह कमेटी अपने मंडल के अंतर्गत आने वाले जिलों में आउटसोर्स भर्ती की प्रक्रिया पर नजर रखेगी और यह देखेगी कि निर्धारित नियमों के मुताबिक काम हो रहा है या नहीं। वहीं जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति काम करेगी। इस समिति में मुख्य विकास अधिकारी और जिला सेवायोजन अधिकारी भी शामिल होंगे। जिला स्तर की समिति अभ्यर्थियों के दस्तावेजों और उनकी योग्यता के सत्यापन में अहम भूमिका निभाएगी।
अभ्यर्थियों की योग्यता और दस्तावेज होंगे चेक
नई व्यवस्था में सिर्फ आवेदन कर देना ही पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित पद के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की शैक्षिक योग्यता और जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जिला स्तर पर यह सत्यापन निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाएगा। प्रशासन यह भी देखेगा कि अभ्यर्थी ने आवेदन में जो जानकारी दी है, वह उसके दस्तावेजों से मेल खाती है या नहीं।
सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पात्र अभ्यर्थियों की सूची तैयार की जाएगी। मंडल स्तर की समिति भी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिलों में होने वाली भर्ती प्रक्रिया में नियमों का पालन हो और पात्रता को लेकर किसी तरह की लापरवाही न हो।
सत्यापन के बाद एजेंसी को भेजी जाएगी पात्र अभ्यर्थियों की सूची
जिला और मंडल स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र अभ्यर्थियों की सूची संबंधित आउटसोर्स एजेंसी को उपलब्ध कराई जाएगी। एजेंसी इसी सूची के आधार पर आगे की चयन प्रक्रिया पूरी करेगी। चयनित अभ्यर्थी को एजेंसी की ओर से प्लेसमेंट इंफॉर्मेशन लेटर जारी किया जाएगा। यानी अभ्यर्थी की नियुक्ति और तैनाती की प्रक्रिया तय नियमों के तहत ही आगे बढ़ेगी। इस व्यवस्था से यह रिकॉर्ड भी रखा जा सकेगा कि किस पद के लिए किस अभ्यर्थी का चयन हुआ, उसका सत्यापन किस स्तर पर हुआ और उसे किस विभाग या संस्था में तैनात किया गया।
यूनिक कोड से कर्मचारियों का रिकॉर्ड होगा व्यवस्थित
यूपीसीओएस के तहत कर्मचारियों और संबंधित विभागों को यूनिक कोड दिए जाने की व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह होगा कि आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी को एक समान सिस्टम में दर्ज किया जा सकेगा। कर्मचारी की पहचान, संबंधित विभाग, पद, चयन और तैनाती जैसी जानकारियों को रिकॉर्ड से जोड़ने में मदद मिलेगी।
इससे अलग-अलग विभागों में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों की जानकारी को व्यवस्थित तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा। सरकार की कोशिश है कि आउटसोर्स व्यवस्था को सिर्फ एजेंसियों के भरोसे छोड़ने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर भी उसकी निगरानी मजबूत की जाए।
भर्ती प्रक्रिया में मनमानी रोकने की कोशिश
आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती को लेकर समय-समय पर पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। नई व्यवस्था में जिला प्रशासन से लेकर मंडल और शासन स्तर तक निगरानी की जिम्मेदारी तय किए जाने से प्रक्रिया पर नियंत्रण बढ़ने की उम्मीद है। खास तौर पर अभ्यर्थियों की योग्यता और दस्तावेजों का सत्यापन प्रशासनिक समितियों के स्तर पर होने से गलत दस्तावेजों या निर्धारित योग्यता पूरी न करने वाले अभ्यर्थियों के चयन की संभावना को कम करने की कोशिश की जाएगी।
विभाग और एजेंसी दोनों की जिम्मेदारी होगी तय
नई व्यवस्था में केवल आउटसोर्स एजेंसी की भूमिका नहीं होगी, बल्कि संबंधित सरकारी विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी। विभाग को अपनी जरूरत के अनुसार पदों की जानकारी और निर्धारित योग्यता स्पष्ट करनी होगी, जबकि प्रशासनिक समितियां पात्रता और दस्तावेजों के सत्यापन की निगरानी करेंगी। इसके बाद पात्र अभ्यर्थियों की सूची एजेंसी को भेजी जाएगी और एजेंसी उसी आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। इस तरह भर्ती प्रक्रिया में विभाग, प्रशासन और एजेंसी, तीनों के बीच जिम्मेदारियां स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और निगरानी आधारित बनाने की दिशा में यह कदम देखा जा रहा है। यूनिक कोड, दस्तावेजों का प्रशासनिक सत्यापन और तीन स्तर की निगरानी से सरकार आउटसोर्स नियुक्तियों का रिकॉर्ड मजबूत करने और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दे रही है।

