नीला ड्रम केस: मेरठ के चर्चित सौरभ हत्याकांड में 30 सितंबर को जिला न्यायालय फैसला सुना सकता है। मामले में 22 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और अभियोजन व बचाव पक्ष की बहस भी पूरी हो चुकी है। सुरक्षा कारणों को देखते हुए आरोपी मुस्कान रस्तौगी और साहिल शुक्ला की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी कराए जाने की संभावना है। मेरठ का चर्चित सौरभ हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब 125 तारीखों तक चली अदालती कार्यवाही के बाद अब मामले में फैसले का इंतजार खत्म होने वाला है। जिला न्यायालय ने 30 सितंबर को निर्णय सुनाने के लिए तारीख तय की है। ऐसे में आज अदालत की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें अदालत के सामने रखीं। बहस पूरी होने के बाद अब अदालत के निर्णय का चरण बाकी है।
डीजीसी कृष्ण कुमार चौबे के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन जिला जज ने इसकी सुनवाई प्रतिदिन किए जाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अलग-अलग न्यायिक प्रक्रियाओं के चलते केस में करीब 125 तारीखें लगीं। अब गवाही और बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 30 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। इस केस की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने गवाह और साक्ष्य अदालत के सामने रखे। वहीं बचाव पक्ष की ओर से भी आरोपों और साक्ष्यों को लेकर अपनी दलीलें पेश की गईं। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने निर्णय सुरक्षित रखा। फैसले के दिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। आरोपी मुस्कान रस्तौगी और साहिल शुक्ला की अदालत में व्यक्तिगत पेशी के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी कराए जाने की संभावना है। हालांकि अंतिम व्यवस्था अदालत और प्रशासन की ओर से तय की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखे जाने की उम्मीद है। फैसले को लेकर लोगों में भी काफी चर्चा है।
मेरठ का यह मामला उस समय देशभर में चर्चा में आया था, जब सौरभ की हत्या के बाद उसके शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले ड्रम का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। पुलिस जांच में सामने आए घटनाक्रम ने मामले को बेहद चर्चित बना दिया था। जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनके आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। मामले की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया में गवाहों के बयान दर्ज किए गए और दोनों पक्षों ने अदालत में अपनी दलीलें रखीं।
सौरभ हत्याकांड में अब मुकदमे की सुनवाई का अहम चरण पूरा हो चुका है। 22 गवाहों की गवाही, करीब 125 तारीखों और दोनों पक्षों की बहस के बाद अब फैसला अदालत के हाथ में है। 30 सितंबर को अदालत क्या निर्णय सुनाती है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी। फैसले से पहले पुलिस-प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क है। आरोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की संभावना के बीच अदालत परिसर में किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए आवश्यक इंतजाम किए जाने की बात कही जा रही है।
























