मेरठ: शहर के लोगों के लिए 19 और 20 सितंबर का दिन खास होने वाला है। इन दो दिनों में मेरठ का आसमान भारतीय वायुसेना की सूर्य किरण एरोबैटिक टीम के रोमांचक हवाई करतबों का गवाह बनेगा। आसमान में एक साथ उड़ते विमान, पलभर में बदलती उनकी दिशा और बेहद करीब से गुजरते जेट लोगों को रोमांचित करेंगे। शो को लेकर शहरवासियों में भी उत्सुकता बढ़ गई है। एयर शो से पहले सूर्य किरण टीम के पायलटों ने अपनी तैयारियों और अनुभवों को साझा किया। स्क्वाड्रन लीडर अमन गोयल और स्क्वाड्रन लीडर विक्रम वेंकटेशन ने अमर उजाला कार्यालय पहुंचकर टीम की ट्रेनिंग, अनुशासन, आपसी तालमेल और हवाई करतबों से जुड़े अनुभव बताए।
दर्शकों को एयर शो के दौरान कुछ मिनटों का रोमांच दिखाई देता है, लेकिन उसके पीछे पायलटों की लंबी और बेहद सटीक तैयारी होती है। आसमान में विमानों का एक साथ उड़ना जितना आसान नजर आता है, वास्तव में उसके लिए उतनी ही कड़ी ट्रेनिंग और बेहतर कोऑर्डिनेशन की जरूरत होती है। सूर्य किरण टीम के पायलटों के मुताबिक, एयर शो में किसी भी करतब के दौरान एक छोटी सी गलती की गुंजाइश नहीं होती। हर पायलट को अपनी स्थिति, विमान की गति, ऊंचाई और आसपास उड़ रहे दूसरे विमान की स्थिति का लगातार ध्यान रखना पड़ता है। यही वजह है कि टीम में ट्रेनिंग और टीम वर्क को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। हर पायलट को न सिर्फ अपने विमान को नियंत्रित करना होता है, बल्कि पूरी टीम के साथ एक ही लय में उड़ना होता है।
स्क्वाड्रन लीडर अमन गोयल और स्क्वाड्रन लीडर विक्रम वेंकटेशन ने बताया कि एरोबैटिक उड़ान में पायलटों के बीच भरोसा बेहद जरूरी है। आसमान में कई विमान बेहद कम अंतर पर एक साथ उड़ते हैं। ऐसे में हर पायलट को अपने साथी की उड़ान और तय प्रक्रिया पर पूरा भरोसा रखना होता है। उनके मुताबिक, सूर्य किरण की उड़ान सिर्फ एक पायलट के कौशल का प्रदर्शन नहीं है। यह पूरी टीम के सामूहिक अनुशासन, अभ्यास और आपसी समझ का परिणाम होती है। जमीन पर की गई तैयारी का असर ही आसमान में दिखाई देता है।
एयर शो में नजर आने वाले हवाई करतबों के लिए पायलट लगातार अभ्यास करते हैं। अलग-अलग फॉर्मेशन और मूवमेंट को कई बार दोहराया जाता है, ताकि वास्तविक प्रदर्शन के दौरान हर पायलट को अपनी भूमिका पूरी तरह स्पष्ट रहे। पायलटों ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान हर छोटी बात पर ध्यान दिया जाता है। किस समय कौन सा विमान कहां रहेगा, किस दिशा में मोड़ लेना है और किस क्षण फॉर्मेशन बदलना है, इन सभी चीजों की पहले से तैयारी की जाती है। आसमान में कुछ सेकंड का अंतर भी पूरे फॉर्मेशन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए यहां टाइमिंग और सटीकता सबसे अहम होती है।
सूर्य किरण एरोबैटिक टीम अपने शानदार फॉर्मेशन और हवाई करतबों के लिए जानी जाती है। एयर शो के दौरान दर्शकों को विमानों की सामूहिक उड़ान, तेज गति से दिशा बदलने और अलग-अलग फॉर्मेशन में आने का रोमांच देखने को मिलेगा। जमीन से देखने पर ऐसा लगता है जैसे विमान एक-दूसरे के बेहद करीब हैं और पलक झपकते ही उनका पूरा फॉर्मेशन बदल गया। लेकिन हर मूवमेंट के पीछे पहले से तय प्रक्रिया और पायलटों के बीच सटीक तालमेल होता है।
सूर्य किरण का एयर शो सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है। यह भारतीय वायुसेना के पायलटों के अनुशासन, प्रशिक्षण और पेशेवर दक्षता की झलक भी दिखाता है। पायलटों ने बातचीत के दौरान बताया कि इस तरह की उड़ानों में आत्मविश्वास के साथ-साथ नियमों का पालन भी उतना ही जरूरी है। हर प्रदर्शन सुरक्षा मानकों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाता है।
19 और 20 सितंबर को होने वाले एयर शो को लेकर मेरठ में खास उत्साह है। शहर के लोग सूर्य किरण टीम के विमानों को आसमान में देखने के लिए तैयार हैं। खासकर बच्चों और युवाओं के बीच इसे लेकर काफी उत्सुकता है। कुछ ही मिनटों में आसमान में बनने वाले अलग-अलग फॉर्मेशन और विमानों की तेज उड़ान लोगों के लिए यादगार अनुभव बन सकती है। वहीं, टीम के पायलटों से हुई बातचीत ने यह भी साफ किया कि दर्शकों को दिखाई देने वाला यह रोमांच केवल कुछ मिनटों का शो नहीं, बल्कि लंबे प्रशिक्षण, अनुशासन, सटीकता और टीम वर्क की पूरी कहानी है। 19 और 20 सितंबर को जब सूर्य किरण के विमान मेरठ के आसमान में उड़ान भरेंगे, तो जमीन पर खड़े हजारों लोगों की नजरें आसमान पर होंगी। उस वक्त हर फॉर्मेशन के पीछे पायलटों की महीनों की मेहनत और टीम के बीच बना भरोसा साफ दिखाई देगा।

