विंध्याचल (मीरजापुर): शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को मां विंध्यवासिनी के धाम में श्रद्धा का अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। तड़के मंगला आरती के साथ ही भक्तों के दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर रात तक चलता रहा। मेले के पहले ही दिन लगभग तीन लाख श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में शीश नवाया। रविवार की छुट्टी और नवरात्र के शुभारंभ के संयोग ने भीड़ को और बढ़ा दिया, जिससे पूरा विंध्याचल आस्था के रंग में रंगा दिखा। मंदिर की ओर जाने वाली पांचों गलियां श्रद्धालुओं से खचाखच भरी रहीं। कई जगह कतार आधे किलोमीटर से भी अधिक लंबी हो गई थी। हाथों में नारियल, चुनरी और प्रसाद थामे भक्त धीरे-धीरे आगे बढ़ते रहे और अपनी बारी का धैर्यपूर्वक इंतज़ार करते रहे। कतारों में गूंजते “जय माता दी” के उद्घोष ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
मंदिर पहुंचकर किसी ने झांकी के दर्शन किए, तो किसी ने प्रथम और द्वितीय प्रवेश द्वार से मां के दर्शन पाकर स्वयं को धन्य माना। दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालु संतोष और विश्वास के भाव के साथ घर लौटते दिखे। उधर, गंगा घाटों पर भी बड़ी संख्या में भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई। नवरात्र मेले में विंध्य कॉरिडोर श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहा। भारी भीड़ के बीच आवागमन को सुव्यवस्थित रखने और भक्तों को सहजता से मंदिर तक पहुंचाने में इसकी उपयोगिता साफ नज़र आई। दर्शनार्थियों की सुविधा के लिहाज़ से इसे काफ़ी मददगार माना जा रहा है।
मेला क्षेत्र में जगह-जगह लगाए गए उद्घोषक यंत्रों से अपनों से बिछड़े लोगों को उनके परिजनों से मिलाने की कोशिश की गई। इन्हीं के ज़रिये श्रद्धालुओं को ज़रूरी सूचनाएं भी दी जाती रहीं, जिससे मेले की व्यवस्था संभालने में मदद मिली। पहले दिन उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी पूरे दिन व्यवस्थाएं संभालने में जुटे रहे। पार्किंग स्थलों, गेस्ट हाउसों, भोजनालयों और अतिथि भवनों में शनिवार से ही यात्रियों का पहुंचना शुरू हो गया था। रविवार को मंदिर परिसर, गलियों और आसपास के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही निरंतर बनी रही। मां के दर्शन की चाह लिए पहुंचे भक्तों की भीड़ से विंध्याचल धाम पूरी तरह भक्ति के रंग में डूबा नज़र आया।
























