उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद में पवित्र एवं ऐतिहासिक रामलीला मैदान को लेकर विवाद गहरा गया है, जहां अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मैदान में मुस्लिम समुदाय के धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन और वहां मांसाहारी भोजन बनाए व परोसे जाने के गंभीर आरोप लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया है।
हिंदू संगठन के कार्यकर्ता राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष रोहन सक्सेना अपने साथियों के साथ रामलीला मैदान की ओर कूच कर रहे थे, जिन्हें भारी पुलिस बल ने रास्ते में ही रोक लिया। जिसके बाद पुलिस और उग्र कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक और बहस हुई। प्रदर्शनकारी रोहन सक्सेना ने बताया कि रामलीला मैदान में भगवान श्री राम की कथा का मंचन, भागवत कथाएं और धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। रामलीला कमेटी द्वारा रामलीला मैदान में कुछ दुकानें मुस्लिमों को किराए पर दी गई हैं। इस दुकानों पर मांस पकाया व खिलाया जा रहा है। यह हिंदू आस्था और मर्यादा पर सीधा प्रहार है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि वहां कोई भी ऐसा आयोजन हुआ तो संगठन खुद उसे रोकेगा। हंगामे और तनाव को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और संगठन को आश्वस्त किया कि 23 अक्टूबर को रामलीला कमेटी और बजरंग दल के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त बैठक कराकर तीन प्रमुख मांगों पर विचार किया जाएगा। इन मांगों के द्वार मुसलमानों को रामलीला मैदान नहीं देने, मैदान में मांस पकाने पर पूर्ण रोक और मांस खाने पर प्रतिबंध लगाने पर निर्णय लिया जाएगा। वहीं, रोहन सक्सेना ने मुस्लिम पक्ष से किसी भी अपील से इनकार करते हुए रामलीला कमेटी के सदस्यों पर कड़ा रुख अपनाया और नवरात्र के पावन अवसर पर उनके लिए सद्बुद्धि की प्रार्थना की,फिलहाल प्रशासन के 23 अक्टूबर के आश्वासन के बाद स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सभी की निगाहें आगामी बैठक पर टिकी हैं।
























