श्रावस्ती: यूपी के श्रावस्ती (Shravasti) में बाढ़ और जलभराव से आम लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और उन्हें अपना घर तक छोड़ना पड़ा है। कई इलाके पानी में डूबे हुए हैं और ऐसे लोगों को दूसरी जगह शरण लेना पड़ रहा है। इस बीच उनके सामने भोजन और रोजगार की चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं।
श्रावस्ती के जमुनहा, इकौना और गिलौला के तटीय इलाकों में जलभराव से ग्रामीणों की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। सिसवारा, कोलाभार, मजगंवा समेत दर्जनों गांवों में अब भी बाढ़ का पानी है और सैकड़ों घर प्रभावित हैं। हालांकि राप्ती नदी का जलस्तर घटने से लोगों को राहत की उम्मीद जगी है, लेकिन तराई क्षेत्र में संकट अभी भी बरकरार हैं।
बिजली और मोबाइल नेटवर्क की भी दिक्कत
कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हैं जबकि मोबाइल नेटवर्क भी प्रभावित होने से संचार व्यवस्था पर बुरा असर पड़ है। जगह-जगह पेड़ और विधुत पोल गिरने से आवागमन प्रभावित हुआ है, कई गांवों तक स्कूली वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। जलभराव के चलते ग्रामीणों को आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
DM अन्नपूर्णा गर्ग लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की मॉनिटरिंग कर रहीं हैं और अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। बाढ़ से प्रभावित फसलों और संपत्तियों के नुकसान के सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस बीच शाहजहांपुर जिले में पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश तो थम गई है, लेकिन अब बरसात के पानी और बाढ़ ने किसानों पर कहर ढाना शुरू कर दिया है।
शाहजहांपुर में किसानों की फसल बर्बाद
खेतों में बारिश का लबालब पानी भर जाने के कारण किसानों की तैयार फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। स्थिति इतनी दयनीय है कि किसान पानी के बीच उतरकर कच्चा धान काटने को विवश हैं। बारिश और तेज हवाओं के कारण पककर तैयार खड़ी धान की फसल चौपट हो गई है, वहीं गन्ने की फसल खेतों में बिछ गई है।
इसके अलावा उड़द, तिल, बाजरा और मक्के की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कर्ज लेकर फसल उगाने वाले किसानों के सामने अब रोजी-रोटी का गहरा संकट खड़ा हो गया है। नेशन 27 की टीम जब हालात का जायजा लेने ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो किसानों का दर्द साफ झलकता दिखाई दिया। पानी से भरे खेत में कच्चा धान कटवा रहे पीड़ित किसान सोनपाल ने बताया कि उन्होंने प्रति एकड़ लगभग 30 हजार से 35 हजार तक की लागत लगाकर धान की फसल तैयार की थी। इस आफत की बारिश ने उनके सारे अरमानों पर पानी फेर दिया।
रिपोर्ट: मनोज कुमार मिश्रा
























