बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के सामने बीती देर रात एक तेल टैंकर अचानक बेकाबू हो गया और सड़क किनारे बने क्लीनिक में जा घुसा। टक्कर इतनी तेज थी कि क्लीनिक के साथ आसपास की दो और दुकानों को भी नुकसान पहुंचा। गनीमत रही कि टैंकर खाली था, वरना यह हादसा कहीं ज्यादा भयावह हो सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, देर रात टैंकर अचानक अपना संतुलन खो बैठा और सड़क छोड़कर किनारे की ओर बढ़ गया। देखते ही देखते वह क्लीनिक की इमारत में जा घुसा। टक्कर की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग घबराकर मौके की ओर दौड़े। जिस वक्त हादसा हुआ, उस समय बाजार में लोगों की आवाजाही बहुत कम थी।
क्लीनिक के बाहर एक स्कूटी खड़ी थी, जो टैंकर की चपेट में आ गई और बुरी तरह कुचल गई। उसकी हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि टक्कर कितनी जोरदार रही होगी। पास में खड़ी एक कार भी इस हादसे की चपेट में आई और उसे भी नुकसान पहुंचा। क्लीनिक के अलावा दो अन्य दुकानों को भी क्षति पहुंची है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि टैंकर में तेल भरा होता, तो हालात बेहद गंभीर हो सकते थे। ज्वलनशील ईंधन की वजह से आग लगने या विस्फोट जैसा खतरा बन सकता था, जिसकी जद में आसपास की दुकानें और मकान भी आ जाते। टैंकर खाली होने के कारण ऐसी किसी आशंका से राहत मिली।
हादसे का एक और राहत भरा पहलू यह रहा कि यह देर रात हुआ। श्रीनगर का यह इलाका दिन के समय खासा व्यस्त रहता है। बैंक के आसपास ग्राहकों, दुकानदारों और राहगीरों की भीड़ रहती है, और क्लीनिक में भी मरीज आते-जाते रहते हैं। यही हादसा दिन में होता, तो जान-माल का नुकसान कहीं बड़ा हो सकता था। रात का वक्त होने से लोगों की संख्या कम थी, इसलिए बड़ी अनहोनी टल गई। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग चारधाम यात्रा का मुख्य मार्ग है और यहां भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। श्रीनगर जैसे घनी आबादी वाले कस्बे में सड़क के बिल्कुल किनारे दुकानें और क्लीनिक होने से ऐसे हादसों का जोखिम बढ़ जाता है। इस घटना ने एक बार फिर भारी वाहनों की रफ्तार, चालकों की थकान और वाहनों की तकनीकी स्थिति जैसे सवालों को चर्चा में ला दिया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि आबादी वाले हिस्सों में भारी वाहनों की गति पर सख्ती और निगरानी जरूरी है।
टैंकर के अनियंत्रित होने की असल वजह अभी स्पष्ट नहीं है। चालक की थकान, वाहन में तकनीकी खराबी या कोई अन्य कारण हो सकता है, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो पाएगा। राहत की बात यही है कि यह हादसा बड़ी जनहानि में नहीं बदला। लेकिन क्षतिग्रस्त क्लीनिक और दुकानों के मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। लोगों ने उम्मीद जताई है कि संबंधित विभाग मामले की जांच कर आगे ऐसे हादसों की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।
























