उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित मशहूर केदारताल ट्रेक पर हिमस्खलन की खबर ने पहाड़ों में आने-जाने वाले रोमांच-प्रेमियों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। भोजखड़क से आगे के हिस्से में बर्फ का बड़ा हिस्सा खिसककर नीचे आ गया। इसकी चपेट में आने से ट्रेकर्स और सहयोगी स्टाफ के कुल आठ लोगों के फंसे होने की जानकारी मिली है। सूचना मिलते ही प्रशासन और बचाव एजेंसियां हरकत में आ गईं।

जानकारी के मुताबिक फंसे हुए लोगों में सात ट्रेकर्स के साथ ट्रेक में मदद करने वाला सहयोगी स्टाफ भी शामिल है। हिमस्खलन के बाद रास्ता बर्फ से ढक गया, जिससे आगे बढ़ना या पीछे लौटना दोनों मुश्किल हो गए। ऊंचाई वाले इलाकों में इस तरह की घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि फंसे लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचा जाए और उन्हें ठंड, थकान और खराब मौसम से बचाया जा सके।

इस बीच राहत की एक खबर भी आई। कच्ची ढांग के पास तीन पोर्टर और एक कुक, यानी कुल चार लोग सुरक्षित मिल गए हैं। इन्हें सुरक्षित स्थान की ओर लाने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि बाकी लोगों की स्थिति को लेकर अभी पूरी तस्वीर साफ नहीं है, इसलिए खोज और बचाव का काम लगातार चल रहा है।
शनिवार को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), वन विभाग और संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी की टीमें रेस्क्यू अभियान में जुट गईं। टीमें पैदल ही दुर्गम रास्तों से होकर प्रभावित क्षेत्र की ओर बढ़ रही हैं। बर्फ में दबे या फंसे लोगों की तलाश के लिए बचाव दल जरूरी उपकरणों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बनाकर काम किया जा रहा है, ताकि कम से कम समय में फंसे लोगों तक पहुंचा जा सके।
इलाका बेहद दुर्गम होने के कारण रेस्क्यू आसान नहीं है। संकरे रास्ते, ऊंचाई, कड़ाके की ठंड और बर्फ की अस्थिर परतें बचाव दल के सामने बड़ी बाधा हैं। ऐसे में हेलीकॉप्टर की मदद लेने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। मौसम साफ रहा और उड़ान की अनुमति मिली तो हवाई रास्ते से फंसे लोगों तक पहुंचना और उन्हें निकालना कहीं तेज हो सकता है। फिलहाल मौसम की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

केदारताल उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय और चुनौतीपूर्ण ट्रेक में गिना जाता है। यह गंगोत्री घाटी में स्थित है और ट्रेक आमतौर पर गंगोत्री से शुरू होकर भोजखड़क जैसे पड़ावों से गुजरता है। ऊंचाई पर बसी यह झील अपने नीले पानी और आसपास की बर्फीली चोटियों के नजारे के लिए जानी जाती है। हर साल बड़ी संख्या में देशी-विदेशी ट्रेकर यहां पहुंचते हैं। लेकिन रास्ता कठिन है, इसलिए इसके लिए अच्छी शारीरिक तैयारी और अनुभवी गाइड का साथ जरूरी माना जाता है।
पहाड़ों में हिमस्खलन कोई नई बात नहीं है, खासकर तब, जब मौसम बदल रहा हो और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ताजा बर्फ जमा हो। ऐसे समय में बर्फ की परतें अस्थिर हो जाती हैं और थोड़ी-सी हलचल से भी खिसक सकती हैं। जानकारों का कहना रहता है कि ट्रेक पर निकलने से पहले मौसम और रास्ते की ताजा स्थिति की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। साथ ही पंजीकृत और अनुभवी एजेंसी के साथ ही यात्रा करनी चाहिए और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

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ट्रेकिंग पर जाने वाले लोगों को जरूरी उपकरण, गर्म कपड़े, प्राथमिक उपचार का सामान और संचार के साधन साथ रखने चाहिए। अपनी यात्रा की योजना और समूह की जानकारी स्थानीय प्रशासन या परिजनों को देकर जाना भी समझदारी है। इससे किसी आपात स्थिति में मदद पहुंचाने में आसानी होती है।
सभी की निगाहें बचाव अभियान पर टिकी हैं। प्रशासन और रेस्क्यू टीमें फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए पूरी ताकत से जुटी हैं। जैसे-जैसे अभियान आगे बढ़ेगा, नई जानकारी सामने आएगी। उम्मीद की जा रही है कि सभी लोग जल्द सुरक्षित निकाल लिए जाएंगे।
























