भारत टैक्सी अब गांव-गांव तक दौड़ेगी, योगी सरकार की तैयारी 75 जिलों तक पहुंचेगी योजना - Nation27 >

लखनऊ और कानपुर की सड़कों पर दौड़ रही “भारत टैक्सी” अब सिर्फ इन दो शहरों तक सीमित नहीं रहेगी। योगी सरकार इस सहकारी टैक्सी मॉडल को प्रदेश के सभी 75 जिलों और गांवों तक पहुंचाने की तैयारी में जुट गई है। यानी आने वाले दिनों में राजधानी से लेकर छोटे कस्बों और दूर-दराज के गांवों तक, यात्रियों को स्थानीय परिवहन का एक भरोसेमंद और सस्ता विकल्प मिलने वाला है।

भारत टैक्सी की सबसे खास बात यह है कि यह सिर्फ यात्रियों के फायदे तक सीमित नहीं है, बल्कि गाड़ी चलाने वाले सारथियों को भी इसमें बराबर की भागीदारी दी गई है। एक तरफ यात्रियों को जीरो कमीशन और नो-सर्ज प्राइसिंग जैसी सुविधाएं मिलती हैं, यानी न तो प्लेटफॉर्म कमीशन के नाम पर किराया बढ़ता है और न ही पीक ऑवर में मनमाना भाड़ा वसूला जाता है। दूसरी तरफ चालकों को महज एक सेवा देने वाले ड्राइवर के रूप में नहीं, बल्कि कारोबार में हिस्सेदार के तौर पर जोड़ा गया है। उनकी हर ट्रिप की कमाई से कमीशन काटने के बजाय उन्हें सहकारी ढांचे में भागीदारी दी जाती है, जिससे उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ता है। मॉडल में बाइक, ऑटो और कैब, तीनों तरह की सवारी सुविधाएं शामिल हैं, ताकि हर वर्ग और हर बजट के यात्री को उनकी जरूरत के मुताबिक विकल्प मिल सके।

अभी तक भारत टैक्सी सेवा लखनऊ और कानपुर तक ही सक्रिय है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब इसे प्रदेशव्यापी स्वरूप देने की योजना बनाई जा रही है। सरकार का मकसद है कि यह सुविधा सिर्फ बड़े शहरों तक न रहे, बल्कि छोटे जिलों और गांवों तक भी इसका दायरा बढ़े। इसके पीछे सोच साफ है, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, एयरपोर्ट, अस्पताल या बाजार तक पहुंचने के लिए हर जिले और हर गांव में लोगों को एक जैसी, भरोसेमंद टैक्सी सुविधा मिलनी चाहिए। ग्रामीण इलाकों तक इस मॉडल को पहुंचाने के लिए सरकार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी पीएसीएस का सहारा लेने की योजना बना रही है। इससे गांव के स्तर पर पहले से मौजूद संगठनात्मक ढांचे का इस्तेमाल कर टैक्सी सेवा को स्थानीय स्तर पर खड़ा किया जा सकेगा। इससे न सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए मौके भी बनेंगे।

इस पूरी योजना की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसमें यात्री और चालक, दोनों के हितों का ध्यान रखा गया है। यात्रियों को पारदर्शी किराया व्यवस्था और सस्ती सवारी का भरोसा मिलेगा, जबकि चालकों को कारोबार में हिस्सेदारी के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाएगा। अगर यह मॉडल सफलतापूर्वक 75 जिलों तक पहुंच पाता है, तो यह उत्तर प्रदेश के परिवहन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जहां शहर और गांव, दोनों जगह के लोगों को एक समान और सुलभ टैक्सी सेवा मिल सकेगी।

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