लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) मैदान में उतर गए हैं और ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं। इसी क्रम में अखिलेश 8 अक्टूबर को अयोध्या का दौरा करेंगे। राम मंदिर के निर्माण के बाद यह उनकी पहली अयोध्या यात्रा होगी। ऐसे में सबकी नजरें इस पर होंगी की क्या अखिलेश यादव प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद लेने राम मंदिर जाएंगे क्योंकि अब तक उन्होंने राम मंदिर से दूरी बनाकर रखी है।
सिर्फ एक घंटे के लिए अयोध्या जाएंगे अखिलेश
दरअसल अखिलेश यादव को लेकर यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि उनका अयोध्या दौरा महज एक घंटे का होगा जिसमें वो पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। जानकारी के मुताबिक अखिलेश यादव 8 अक्टूबर की दोपहर करीब 3:20 मिनट पर हेलीकॉप्टर से अयोध्या के लिए प्रस्थान करेंगे। उनका हेलीकॉप्टर अयोध्या के रामलीला मैदान में उतरेंगे जहां से वो कार के जरिए तेज नारायण पांडेय के कार्यक्रम में पहुंचेंगे।
आगे बताया गया है कि कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वो अपनी सुविधा अनुसार लखनऊ लौटेंगे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि वोटों के समीकरण को बिगड़ने से बचाने के लिए अब तक राम मंदिर से दूरी रखने वाले अखिलेश क्या इस बार प्रभु का दर्शन करेंगे। हालांकि उनके हनुमानगढ़ी जाने की भी खबरें हैं।
क्या राम मंदिर जाएंगे अखिलेश
बता दें कि जब राम मंदिर नहीं जाने को लेकर अखिलेश यादव से पत्रकारों ने एक बार सवाल पूछा था तो समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि ‘जब भगवान बुलाते हैं, तभी कोई व्यक्ति दर्शन के लिए जाता है।’ वहीं अखिलेश यादव के राम मंदिर से दूरी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अखिलेश यादव को राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण दिया गया था, लेकिन वो नहीं आए। इस पर अखिलेश ने जवाब देते हुए कहा था कि श्रद्धा और आस्था यही कहती है कि जब प्रभु बुलावा भेजते हैं, तभी इंसान वहां जाता है।
राम मंदिर जाने से क्यों बचते हैं अखिलेश यादव
दरअसल अखिलेश यादव के राम मंदिर से दूरी बनाए रखने को लोग उनकी सियासत से जोड़कर देखते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राम मंदिर निर्माण के इतिहास और बीजेपी के आक्रामक हिन्दुत्व वाली छवि की वजह से वो राम मंदिर जाने से बचते रहे हैं।
विश्लेषक इसके पीछे मुस्लिम वोट बैंक को सबसे बड़ा कारण बताते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2022 के विधानसभा चुनाव में लगभग 79% मुस्लिम मतदाताओं ने समाजवादी पार्टी को वोट दिया था। इसके अलावा मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी को 80% से 94% वोट तक अल्पसंख्यकों का मिलता है। शायद यही कारण है कि अखिलेश यादव अपने इस बड़े वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहते हैं।
रिपोर्ट: कुणाल कौशल
























