जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद (GDP – Gross Domestic Product) के ताजा आंकड़ों को लेकर मोदी सरकार बमबम है। एनडीए के तमाम नेता और मंत्री इसकी तारीफ कर रहे हैं वहीं कांग्रेस को इन आंकड़ों से मिर्ची लग गई है।
दरअसल वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो देश की इकनॉमी में 7.8% फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं 2026-27 की पहली तिमाही में नॉमिनल जीडीपी में 10.3% का इजाफा हुआ है। ऐसे में जीडीपी के ताजा आंकड़ों को लेकर पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा कि 7.8% ग्रोथ, मजबूत आंकड़े, उससे भी मजबूत भरोसा।
कांग्रेस फैला रही ‘झूठ की गूंज’: पीएम मोदी
उन्होंने इसे देश की सामूहिक जिम्मेदारी और ताकत का प्रदर्शन बताया। पीएम ने कहा कि इस समय दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही है और वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित है लेकिन भारत इन चुनौतियों में भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है।
पीएम ने इन आंकड़ों के जरिए बिना नाम लिए कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग इससे निराशा में डूबे हुए हैं लगातार ‘झूठ की गूंज’ और निराशा फैला रहे हैं। बता दें कि कांग्रेस ‘छात्रों की गूंज’ नाम से देशव्यापी कार्यक्रम आयोजित कर रही है जिसके लेकर पीएम ने ये कटाक्ष किया।
7.8% growth.
Strong numbers.
Even stronger confidence. pic.twitter.com/ZVPpnAXrVU
— Narendra Modi (@narendramodi) September 1, 2026
मल्लिकार्जुन खड़गे ने किया पलटवार
कांग्रेस को पीएम मोदी का यह बयान और जीडीपी का नया आंकड़ा रास नहीं आया। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे से लेकर पार्टी के तमाम नेता एनडीए सरकार पर हमलवार हो गए। पीएम मोदी के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पर लंबा चौड़ा पोस्ट लिखकर इसे, लाइट्स, कैमरा और इनएक्शन वाला पीआर स्टंट बताया।
उन्होंने लिखा, ‘प्रधानमंत्री भले ही आंकड़ों का जश्न मना रहे हों लेकिन देश के आम आदमी के पास यह सुविधा नहीं है और वो 3-U की मार झेल रहा है जिसके लिए प्रधानमंत्री ही जिम्मेदार हैं’। खड़गे ने पोस्ट में आगे इसका मतलब समझाते हुए तीन बड़े आरोप लगाए। उन्होंने लिखा, ‘देश इस समय अभूतपूर्व बेरोजगारी, असहनीय महंगाई और असानता से जूझ रहा है। देश में बेरोजगारी 50 सालों के उच्चतम स्तर पर और देश के 40 फीसदी पढ़े-लिखे युवा भी बेरोजगार हैं। खड़गे के इस हमले के बाद कांग्रेस के तमाम नेताओं ने भी इसको लेकर मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया।
पप्पू यादव ने भी बोला हमला
बिहार के पूर्णिया से कांग्रेस समर्थक सांसद पप्पू यादव ने इन आंकड़ों पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और देश के 80-90 फीसदी लोग इन लुटेरे नेताओं से परेशान हो चुके हैं, ऐसे में इनको जीडीपी का कौन सा ग्रोथ दिखता है। पप्पू यादव ने आगे कहा, ‘आम आदमी आत्महत्या कर रहा है, रुपये की वैल्यू नहीं है, लोगों की जिंदगी तबाह है तो वो किस जीडीपी की बात कर रहे हैं।’
कांग्रेस को मिर्ची क्यों लगी है ?
अब ऐसे में सवाल उठते हैं कि आखिर कांग्रेस को जीडीपी के इन ताजा आंकड़ों से इतनी मिर्ची क्यों लग रही है। इसे समझने के लिए हमें 12 साल पीछे यानी कांग्रेस के अंतिम शासनकाल 2014 के आंकड़ों को समझना होगा। दरअसल साल 2014 में भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर (करीब 2.04 ट्रिलियन डॉलर) थी और अभी 4.15 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है।
साल 2014 में जब कांग्रेस सरकार थी उस वक्त देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.3 फीसदी थी जो अभी वैश्विक चुनौतियों के बाद भी 7.8 फीसदी है। यानी की देश की अर्थव्यवस्था इन चुनौतियों के बाद भी सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ रही है। अब आज के परिदृश्य को समझते हैं। कांग्रेस बीते कई सालों से लगातार आरोप लगा रही है कि देश की अर्थव्यवस्था डूब रही है, बेरोजगारी चरम पर है, रुपये का अवमूल्यन हो रहा है, कर्ज बढ़ता जा रहा है।
कांग्रेस से छिन गया चुनावी मुद्दा ?
खड़गे अपने ताजा बयान में भी ऐसा ही दावा कर रहे हैं लेकिन मौजूदा आंकड़े कांग्रेस के इन दावों की हवा निकाल देते हैं। ऐसे में कांग्रेस आम लोगों के मन में मौजूदा सरकार के प्रति नाराजगी पैदा नहीं कर पा रही है। कांग्रेस को मिर्ची लगने का दूसरा कारण ये है कि अब एनडीए सरकार आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाकर लोगों को ये समझाएगी कि पीएम मोदी के नेतृत्व में इतनी चुनौतियों के बाद भी देश आगे बढ़ रहा है।
ऐसे में कांग्रेस के लिए महंगाई, अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर बीजेपी को चुनाव में घेरना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि इसका काउंटर करने के लिए बीजेपी के पास जीडीपी के ताजा आंकड़े होंगे। यही वजह है कि कांग्रेस अब इन आंकड़ों को झुठलाने की कोशिश में जुटी हुई है।
रिपोर्ट: कुणाल कौशल

