यूरोप में हालिया हिंसा के दौरान इटली के कई शहर भी हिंसा की आग में झुलस गए। महंगाई के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन मिलान, तुरिन और बोलोग्ना में उग्र रूप ले चुके हैं। दुकानों के शीशे टूटे, सड़कों पर आगज़नी हुई और पुलिस पर पथराव हुआ। हालात बिगड़ने पर प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपनी कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई। इसी बीच भारत के सोशल मीडिया पर एक नई बहस चल पड़ी है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या इटली को भी उत्तर प्रदेश जैसी सख्ती अपनानी चाहिए। इसी सिलसिले में “योगी मॉडल” शब्द ख़ूब उछल रहा है।
यूरोप में बढ़ती महंगाई के विरोध में ट्रेड यूनियन के द्वारा विरोध प्रदर्शन का आवाहन किया गया। इस दौरान हज़ारों लोग शांति से सड़कों पर उतरे, लेकिन शाम होते-होते कुछ उग्र गुट भीड़ में घुस आए। मिलान की मशहूर गैलेरिया विटोरियो इमानुएले में तोड़फोड़ और लूटपाट की खबरें आईं। कई पुलिसकर्मी घायल हुए और नुकसान का अनुमान लाखों यूरो तक पहुंच गया। मेलोनी ने साफ कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों का वे सम्मान करती हैं, पर पुलिस पर हमले और शहर को पहुंचाए गए नुकसान को किसी भी हाल में जायज़ नहीं ठहराया जा सकता।
इतालवी समाचार एजेंसी ANSA के मुताबिक, सरकार ऐसे उपायों पर विचार कर रही है जिनसे भविष्य में हिंसा रोकी जा सके। इनमें कर्फ्यू लागू करने के तकनीकी रास्ते भी शामिल बताए जा रहे हैं। मेलोनी सरकार तीन दक्षिणपंथी और रूढ़िवादी दलों के गठबंधन से चल रही है और कानून-व्यवस्था उसके लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। उत्तर प्रदेश में दंगों और तोड़फोड़ के मामलों में सरकारी व निजी संपत्ति के नुकसान की वसूली उपद्रवियों से कराने की नीति को समर्थक “योगी मॉडल” कहते हैं। इटली के हालात देखकर कई लोग सोशल मीडिया पर यही तर्क दे रहे हैं कि जो नुकसान करे, भरपाई भी वही करे। हालांकि अभी तक इटली सरकार की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है कि वहां इस मॉडल को लागू किया जाएगा।
विपक्ष और कई नागरिक संगठन सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि लोगों की असली परेशानी महंगाई है, और सिर्फ सख्ती से उसका हल नहीं निकलेगा। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कर्फ्यू जैसे कदम लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर डाल सकते हैं। वहीं सरकार के समर्थक कहते हैं कि हिंसा करने वालों पर नरमी दिखाना जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ होगा। आने वाले दिनों में साफ होगा कि मेलोनी सरकार कौन से कदम उठाती है। क्या नुकसान की वसूली का कोई कानूनी ढांचा बनेगा, या सुरक्षा बलों को अतिरिक्त अधिकार मिलेंगे, यह देखना बाकी है। फिलहाल इतना तय है कि इटली के ये दंगे सिर्फ वहां की नहीं, बल्कि भारत की राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन गए हैं।























