लखनऊ। राज्यसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा का टिकट दिए जाने पर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर करारा तंज कसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने उच्च सदन के लिए पूंजीपतियों को आगे बढ़ाया है। मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि बसपा की कार्यशैली इससे बिल्कुल अलग है। उनके मुताबिक पार्टी न तो अपने परिवार के लोगों को टिकट देती है और न ही धन्नासेठों को। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि बसपा में टिकट का आधार पैसा या रिश्तेदारी नहीं, बल्कि पार्टी के प्रति समर्पण और मिशन से जुड़ाव है।
बसपा लंबे समय से खुद को दलितों, वंचितों और कमजोर वर्गों की आवाज बताती रही है। मायावती अक्सर अपने भाषणों में यह बात दोहराती हैं कि पार्टी का संगठन कार्यकर्ताओं की मेहनत पर खड़ा है, किसी की दौलत पर नहीं। ताजा बयान को भी इसी सोच की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा जैसे उच्च सदन के लिए उम्मीदवार चुनते समय हर दल की अपनी रणनीति होती है। कई बार पार्टियां आर्थिक रूप से सक्षम या प्रभावशाली चेहरों पर दांव लगाती हैं, तो कई बार संगठन के पुराने नेताओं को मौका दिया जाता है। ऐसे में मायावती का यह हमला सपा की उम्मीदवार चयन नीति पर सीधा सवाल माना जा रहा है।
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हालांकि मायावती के आरोपों पर सपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना अभी बाकी है। आमतौर पर ऐसे बयानों के बाद दोनों दलों के बीच जुबानी जंग और तेज हो जाती है। आने वाले दिनों में राज्यसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच यह मुद्दा सियासी बहस का हिस्सा बना रह सकता है। फिलहाल इतना तय है कि बसपा प्रमुख ने इस बयान के जरिए अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एक बार फिर यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी में टिकट बंटवारे का पैमाना अलग है। अब जनता और राजनीतिक विश्लेषक देखेंगे कि इस तंज का चुनावी माहौल पर कितना असर पड़ता है।
























