उत्तर प्रदेश के बरेली में प्रेम और भरोसे की एक कहानी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। मुस्लिम युवती मेहताब ने हिंदू रीति-रिवाज से जागेश के साथ सात फेरे लिए और जीवन भर साथ निभाने का संकल्प लिया। विवाह के बाद उसने अपना नाम बदलकर ममता रख लिया है। शादी की सभी रस्में पूरे विधि-विधान से संपन्न हुईं। मंत्रोच्चार के बीच जयमाला की रस्म हुई, जागेश ने मांग में सिंदूर भरा और दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। वर-वधू ने एक-दूसरे को सात वचन भी दिए। इस मौके पर जागेश के परिजन भी मौजूद रहे और उन्होंने नवदंपती को सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया।
मुस्लिम युवती मेहताब रामपुर की मूल निवासी है, और उसने मुरादाबाद निवासी जागेश संग शादी की है। मेहताब का कहना है कि काफी समय से उसकी हिंदू धर्म में आस्था थी। वह काफी समय से भगवान शिव की पूजा अर्चना करती रही है। अब उसने मुस्लिम धर्म त्याग कर अपना नाम ममता रख लिया है। बरेली के एक आश्रम में दोनों ने अग्नि के साथ फेरे लेकर सात जन्मों तक जीने मरने की कसम खाई है। दोनों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन और सरकार से भारतीय नियमानुसार सुरक्षा की गुहार भी लगाई है। इस दौरान दोनों की सुरक्षा को देखते हुए शादी की रस्मों को गुप्त रखा गया था।
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बताया जा रहा है कि मेहताब और जागेश की मुलाकात कुछ दिन पहले हुई थी। समय के साथ जान-पहचान दोस्ती में बदली और फिर दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। आखिरकार दोनों ने अपने रिश्ते को सामाजिक पहचान देने का फैसला किया। मुस्लिम युवती मेहताब का कहना है कि उसने यह निर्णय अपनी मर्जी से लिया है। शादी के बाद नवविवाहित जोड़ा बेहद खुश नजर आया। दोनों ने कहा कि अब वे एक नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं और चाहते हैं कि उनके फैसले का सम्मान किया जाए।स्थानीय लोगों ने भी दोनों को शादी की बधाई दी और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। फिलहाल यह विवाह क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, और लोग नवदंपती के सुखद भविष्य की कामना कर रहे हैं।






















