नई दिल्ली: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया और SIR प्रकिया को लेकर नेता विपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) बीते तीन सालों में इस समय सियासी तौर पर सबसे ज्यादा एक्टिव दिख रहे हैं। बीते दो दिनों में राहुल गांधी ने करीब 14 घंटे सड़क पर संघर्ष करते हुए बिताए हैं और दो बार पुलिस उन्हें अब तक हिरासत में ले चुकी है। अब शनिवार यानी 10 अक्टूबर को इसी मुद्दे को लेकर सीजेपी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगी लेकिन राहुल गांधी इस मामले में सबसे आगे नजर आ रहे हैं।
सियासी तौर पर क्यों इतने एक्टिव हैं राहुल गांधी
ऐसे में दो सवाल उठ रहे हैं की क्या राहुल गांधी इस मुद्दे के जरिए देश की राजनीतिक नैरेटिव को बदलने की कोशिश में जुटे हैं ? क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से सुर्खियों में आए कॉकरोच जनता पार्टी को वो इसका क्रेडिट लेने देना नहीं चाहते हैं ? दरअसल जहां राहुल गांधी देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनुमति नहीं मिलने के बाद भी प्रदर्शन की कोशिश के जरिए राष्ट्रीय मीडिया और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं वहीं कॉकरोच जनता पार्टी ने मुंबई और बेंगलुरु में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया.
वोट चोरी पर कांग्रेस ने छीन ली CJP की चमक
हालांकि चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी के आक्रमक प्रदर्शन की वजह से इस बार अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन का चेहरा नहीं बन पाई। इस दौरान अभिजीत दीपके ने मुंबई में भी प्रदर्शन किया था और बेंगलुरु में भी सड़कों पर उतरे लेकिन इस आंदोलन का असली चेहरा इस बार राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बनकर उभरे हैं। मुंबई में दीपके के प्रदर्शन में भीड़ जरूर जुटी लेकिन राजधानी दिल्ली से दूरी की वजह से वो सुर्खियां नहीं बटोर पाई।
वहीं राहुल गांधी ने 6 अक्टूबर को बहन प्रियंका गांधी और कांग्रेस समेत विपक्षी सांसदों के साथ चुनाव आयोग जाने की मांग को लेकर 8 घंटे तक आकाशवाणी परिसर में धरना दिया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और कुछ घंटों के बाद वहां से हटाकर छोड़ दिया। इसके बाद राहुल गांधी ने 7 अक्टूबर को फिर विपक्षी सांसदों के साथ जंतर-मंतर के लिए रवाना हुए और जब पुलिस ने रोकने की कोशिश तो बैरिकेडिंग पर खड़े होकर विरोध जताया और इस दौरान तिरंगा लहराते भी नजर आए।
दीपके को लीड लेने नहीं देना चाहती कांग्रेस
इसके बाद पुलिस उन्हें फिर जबरन उठाकर ले गई और दो घंटे बाद छोड़ दिया। राहुल गांधी की इस सक्रियता को GenZ वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है जो आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव में नए-नए वोटर बनेंगे।
इसके साथ ही धर्मेंद्र प्रधान वाले मामले में जिस तरह से GenZ कॉकरोच जनता पार्टी के साथ जुड़ते हुए दिखाई दे रहे थे उसी से सबक लेकर कांग्रेस इस बार इस मुद्दे पर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती है। यही वजह है कि साल 2023 के भारत जोड़ो यात्रा के बाद यह राहुल गांधी का सबसे बड़ा सियासी प्रदर्शन है और इस दौरान वो कई घंटे तक सड़कों पर डटे हुए नजर आ रहे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी पहली बार सड़कों पर इस तरह संघर्ष करते हुए नजर आ रहे हैं।
राहुल गांधी की छवि मजबूत करने की कवायद
राहुल गांधी के इस आक्रमक सियासी संघर्ष के बीच कांग्रेस का एक मुख्य मकसद ये भी है कि इसे सिर्फ वोटर लिस्ट में गड़बड़ी से जोड़कर नहीं बल्कि बड़ा मुद्दा बनाकर वोटों के अधिकार और चुनाव की निष्पक्षता से जोड़ दिया जाए ताकि आने वाले महीनों में एक राजनीतिक अभियान के तौर पर इसे खड़ा किया जा सके।
इस सक्रियता के पीछे कांग्रेस का मकसद राहुल गांधी की गंभीर और लोगों के अधिकारों के लिए खड़े रहने वाले नेता की छवि को भी मजबूत करना है। हालांकि कांग्रेस के इस प्रदर्शन के अलावा 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने भी दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया है।
ऐसे में कहा जा रहा है कि इस प्रदर्शन से पहले ही राहुल-प्रियंका के आक्रमक तेवर ने अभिजीत दीपके का गेम पलट दिया है क्योंकि चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का चेहरा राहुल गांधी बन गए हैं। अब 10 अक्टूबर को अभिजीत दीपके के विरोध-प्रदर्शन के आह्वान पर कितनी भीड़ जुटती है ये तो उसी दिन पता चलेगा लेकिन चुनाव आयोग के खिलाफ माहौल बनाने में राहुल गांधी लीड बनाते अभी जरूर नजर आ रहे हैं।
रिपोर्ट: कुणाल कौशल
























