नई दिल्ली। राजधानी का जंतर-मंतर बरसों से लोगों की आवाज़ उठाने की जगह माना जाता रहा है, लेकिन इन दिनों यहाँ की तस्वीर कुछ अलग है। यहाँ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है। इसके तहत पोस्टर-बैनर दिखाने, धरना देने, नारेबाजी करने और भाषण देने पर पूरी तरह रोक रहेगी। सुरक्षा को देखते हुए इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया है। धारा 163 पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 का नया रूप है। इसे किसी इलाके में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाया जाता है। इसके लागू होने पर तय क्षेत्र में लोगों के इकट्ठा होने, जुलूस निकालने या बिना अनुमति कार्यक्रम करने पर पाबंदी होती है। आदेश तोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
जंतर-मंतर के आसपास जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए हैं। पुलिसकर्मी अलग-अलग जगहों पर मौजूद हैं और कई रास्तों पर आने-जाने वालों की जांच भी हो रही है। पुलिस का कहना है कि ये कदम किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और यातायात को सुचारू रखने के लिए उठाए गए हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और प्रशासन का सहयोग करें। इस आदेश का असर आसपास के दफ्तरों, दुकानदारों और रोजाना सफर करने वालों पर भी पड़ रहा है। जांच की वजह से कई जगह जाम लग सकता है, इसलिए पुलिस ने लोगों को वैकल्पिक रास्ते अपनाने की सलाह दी है। ज़रूरत पड़ने पर नज़दीकी मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही भी नियंत्रित की जा सकती है।
प्रशासन का तर्क है कि भीड़ और टकराव की आशंका को देखते हुए ऐसे एहतियाती कदम ज़रूरी हैं। वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई संगठनों का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का अहम हिस्सा है और जंतर-मंतर जैसी जगह पर इतनी सख़्ती से अभिव्यक्ति की आज़ादी प्रभावित होती है। ऐसे में सुरक्षा और अधिकारों के बीच संतुलन बनाना ही असली चुनौती है। फ़िलहाल पुलिस का कहना है कि हालात पर नज़र बनी हुई है और ज़रूरत के मुताबिक आगे के निर्देश जारी किए जाएँगे। जो लोग अपनी बात रखना चाहते हैं, उनके लिए प्रशासन से अनुमति लेना ही कानूनी रास्ता है।
























