नई दिल्ली: देश में त्योहारी सीजन देखते हुए नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी की NPCI ने यूपीआई (UPI) पेमेंट पर लगने वाले एमडीआर को लागू करने से रोक दिया है। इसका मतलब ये हुआ कि दुर्गापूजा, दीवाली और अन्य त्योहारों पर ना तो दुकानदार और ना ही ग्राहकों को कोई चार्ज देना होगा। 13 अक्तूबर से लागू होने वाले इस फैसले को फिलहाल टाल दिया गया है।
क्या है MDR
यूपीआई पेमेंट पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी की MDR को लागू करने की नई तारीख का ऐलान त्योहारों के बाद किया जाएगा। इस फैसले को अभी टालने का मुख्य कारण त्योहारों में खरीदारी के दौरान व्यवसायी और आम ग्राहकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम करना है। बता दें कि जब इसे लागू करने का फैसला किया गया था तो उस वक्त भी कारोबारियों और कंपनियों ने सरकार से इस फैसलों को कम से कम त्योहारों तक टालने की मांग की थी। हालांकि सरकार की तरफ से कहा गया था कि उपभोक्ताओं के लिए लेने-देन पूरी तरह मुफ्त ही होगा।
सरकार ने कितना चार्ज लगाने का लिया था फैसला
2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई से होने वाले लेनदेन पर NPCI ने चुनिंदा मर्चेंट से 0.4 फीसदी तक एमडीआर वसूलने का फैसला लिया था। इस नियम के तहत एमडीआर चार्ज सिर्फ दुकानदारों से वसूला जाना था किसी ग्राहक से नहीं। इसका मतलब ये हुआ कि गूगल पे, फोन पे या अन्य यूपीआई ऐप इस्तेमाल करने वाले लोगों को इसके लिए कोई पैसा नहीं देना था।
2000 रुपये पर कितना चार्ज
हालांकि सरकार के एमडीआर लगाने के फैसले को लेकर कहा जा रहा था कि दुकानदार इस चार्ज को अपनी लागत में जोड़कर ग्राहकों से ही वसूलेंगे। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर एमडीआर को लागू किए जाने के बाद आप किसी दुकानदार को खरीदारी के लिए पांच हजार रुपये का भुगतान करते तो दुकानदार को इसके बदले सरकार को 20 रुपये देना पड़ता और अगर 2000 हजार रुपये करते तो 8 रुपये उसे चार्ज के तौर पर सरकार को देना होता।
इसको लेकर कहा जा रहा था कि दुकानदार इस चार्ज को भी ग्राहकों के भुगतान में ही जोड़ देते जिससे असली चूना आम लोगों को ही लगता। हालांकि अब इसे टालने के फैसले के बाद दुकानदारों ने भी चैन की सांस ली है।
रिपोर्ट: कुणाल कौशल
























