लखनऊ: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में विधानसभा चुनाव की आहट अब जोर-शोर से सुनाई देने लगी है। चंद महीनों में इसका ऐलान होगा लेकिन इससे पहले ही राज्य के तमाम सियासी दल चुनावी दंगल में उतरने के लिए अपनी कमर कस चुके हैं।
एक तरफ जहां बीजेपी जीत की हैट्रिक लगाने का सपना देख रही है वहीं दूसरी तरफ दस सालों से सत्ता से बाहर समाजवादी पार्टी कुर्सी पाने के लिए हर दांव-पेंच को जमीन पर उतार रही है। कांग्रेस ज्यादा से ज्यादा सीटें पाने की जद्दोजहद में जुटी हुई है तो मायावती की पार्टी बीएसपी ने अकेले ही मैदान में उतरने का फैसला कर लिया है।
वहीं सुभासपा और निषाद पार्टी जैसे छोटे क्षेत्रीय दल अपने नाते-रिश्तेदारों का पॉलिटिकल करियर बनाने की जुगत में लगे हुए हैं। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि आखिर यूपी के बीते पांच विधानसभा चुनाव में किस दल ने सत्ता की लड़ाई में फतह हासिल की है और किसे शिकस्त मिली। कितनी सीटें पर किसने बाजी मारी ? किस दल को इन पांच चुनावों में कितना वोट शेयर मिला और लोगों ने उन पर कितना भरोसा किया ?
2002 में समाजवादी पार्टी पड़ी भारी, लेकिन कुर्सी मायावती के पास आयी
इसकी शुरुआत करते हैं साल 2002 के विधानसभा चुनाव से जिसमें समाजवादी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी तो बनी, लेकिन बहुमत से दूर रही। इसके बाद बीएसपी और बीजेपी के समर्थन से यूपी सरकार बनी और कम सीटें जीतकर मायावती मुख्यमंत्री बनीं।
इस चुनाव में समाजवादी पार्टी को 143 सीटें मिली थी और पार्टी ने 25.37 फीसदी वोट हासिल किए थे. वहीं बहुजन समाज पार्टी को 98 सीटें (26.06 फीसदी वोट शेयर), बीजेपी को 88 सीटें (20.8 फीसदी वोट शेयर), कांग्रेस को 25 सीटें (लगभग 8.96 फीसदी वोट शेयर) और राष्ट्रीय लोक दल को 14 सीटें (4.81 फीसदी वोट शेयर) मिली थी।

2007 में मायावती ने हासिल किया पूर्ण बहुमत
अब अगर 2007 के विधानसभा चुनाव नतीजों को देखें तो बहुजन समाज पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने पूर्ण बहुमत हासिल किया। इस चुनाव में बीएसपी को 206 सीटें मिली थीं और पार्टी का वोट शेयर 30.43 फीसदी रहा।
वहीं समाजवादी पार्टी को 97 सीटें और 25.43 फीसदी वोट मिले थे। बीजेपी ने 51 सीटें जीतकर 16.97 फीसदी वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस को 22 सीटें और 8.61 फीसदी वोट मिले थे। राष्ट्रीय लोक दल ने 10 सीटें जीती थीं और उसका वोट शेयर 3.70 फीसदी रहा। चुनाव परिणाम के बाद मायावती ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बीएसपी ने अपने दम पर सरकार बनाई थी।

2012 में साइकिल ने मारी बाजी, अखिलेश बने सीएम
हालांकि साल 2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ और समाजवादी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत हासिल कर लिया। इस चुनाव में 224 सीटें मिली थी और पार्टी का वोट शेयर 29.15 फीसदी रहा।
वहीं बहुजन समाज पार्टी 80 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही और उसे 25.91 फीसदी वोट मिले। बीजेपी ने 47 सीटें जीतकर 15 फीसदी वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस को 28 सीटें और लगभग 11.63 फीसदी वोट मिले थे। राष्ट्रीय लोक दल को 9 सीटें मिली थीं और उसका वोट शेयर 2.33 फीसदी रहा। इस चुनाव के बाद अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और समाजवादी पार्टी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।

2017 में खत्म हुआ बीजेपी का वनवास
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ और यूपी में बीजेपी का वनवास खत्म हुआ। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए पूर्ण बहुमत हासिल किया। बीजेपी को 312 सीटें मिली थीं और उसका वोट शेयर 39.67 फीसदी रहा।
वहीं समाजवादी पार्टी को 47 सीटों पर सिमट गई और पार्टी को 21.82 फीसदी वोट मिले थे। बहुजन समाज पार्टी को सिर्फ 19 सीटों पर जीत मिली, हालांकि उसका वोट शेयर 22.23 फीसदी रहा। कांग्रेस को 7 सीटें मिली थीं और पार्टी का वोट शेयर 6.25 फीसदी था। राष्ट्रीय लोक दल ने एक सीट जीती और उसे 1.78 फीसदी वोट मिले। इस चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और बीजेपी ने अपने दम पर सरकार बनाई।

2022 में बीजेपी को फिर मिली जीत लेकिन घट गई सीट
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत हासिल किया लेकिन 2017 के मुकाबले बीजेपी की सीटें घट गई। इस चुनाव में बीजेपी को 255 सीटें मिली थीं और पार्टी का वोट शेयर 41.29 फीसदी रहा। वहीं समाजवादी पार्टी ने 111 सीटें जीतकर 32.06 फीसदी वोट हासिल किए थे।
बहुजन समाज पार्टी को केवल एक सीट मिली, जबकि उसका वोट शेयर 12.88 फीसदी रहा। कांग्रेस को दो सीटें और 2.33 फीसदी वोट मिले। राष्ट्रीय लोक दल ने 8 सीटें जीतकर 2.85 फीसदी वोट हासिल किए। इस चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने और बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बरकरार रखी।

अब 2027 में एक बार फिर यूपी में सियासी दंगल छिड़ गया है और जीत की हैट्रिक लगाने के लिए बीजेपी ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है, वहीं अखिलेश यादव की अगुवाई में समाजवादी पार्टी ने भी सत्ता में वापसी के लिए पीडीए का दांव खेला है। पीडीए को अखिलेश यादव की नई सोशल इंजीनियरिंग से जोड़ कर देखा जा रहा है।
(नोट – सभी आंकड़े चुनाव आयोग की वेबसाइट से लिए गए हैं)
रिपोर्ट: कुणाल कौशल



























