यूक्रेन में स्टारलिंक सैटेलाइट सेवा में आई रुकावट का मामला अब अमेरिकी राजनीति में गरमा गया है। रिपब्लिकन पार्टी के दो वरिष्ठ सांसदों ने मांग की है कि कांग्रेस इसकी जांच करे और बताए कि सेवा में बाधा तकनीकी वजह से आई या किसी के निर्देश पर डाली गई। उनका कहना है कि यूक्रेनी सेना जिस संचार प्रणाली के भरोसे मोर्चे पर डटी है, उसमें बिना वजह की अड़चन सैनिकों की जान पर भारी पड़ सकती है। ओहायो के कांग्रेस सदस्य माइक टर्नर और नॉर्थ डकोटा के सीनेटर केविन क्रेमर ने रविवार को साफ कहा कि वाशिंगटन को यह पता लगाना चाहिए कि स्टारलिंक और उससे जुड़ी सैन्य सुविधाओं, जिनमें ‘स्टारशील्ड’ भी शामिल है, में गड़बड़ी के लिए कौन जिम्मेदार है।
यह मांग ऐसे वक्त उठी है, जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बताया कि सैटेलाइट सेवाएं अभी तक पूरी तरह चालू नहीं हो पाई हैं। उन्होंने यह इशारा भी किया कि ये पाबंदियां अमेरिकी सरकार के निर्देशों के बाद लगाई गई थीं। टर्नर हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमिटी के सदस्य हैं और हाउस इंटेलिजेंस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने प्रशासन की उस सफाई को मानने से इनकार कर दिया कि सेवा में बाधा किसी स्पष्ट सरकारी आदेश के बिना आई थी। सीबीएस के कार्यक्रम ‘फेस द नेशन’ में जब टर्नर से पूछा गया कि क्या विदेश मंत्री मार्को रुबियो का स्पष्टीकरण संतोषजनक है, तो उनका जवाब सीधा था: “बिल्कुल नहीं।” उन्होंने कहा कि यह ऐसा मामला है, जिस पर संसदीय जांच होनी ही चाहिए। रुबियो पहले कह चुके हैं कि व्हाइट हाउस में किसी ने भी स्टारलिंक की गति घटाने का आदेश नहीं दिया था।
टर्नर ने कहा कि इस रुकावट के पीछे जो भी लोग हैं, उनकी पहचान होनी चाहिए, क्योंकि ऐसे फैसलों से जानें खतरे में पड़ सकती हैं और जा भी सकती हैं। यूक्रेन से मिल रही खबरों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि सैटेलाइट सेवा लगातार उपलब्ध नहीं है। कुछ इलाकों में यह लौट आई है, जबकि कई जगह अब भी ठप है। टर्नर के मुताबिक, जिन सेवाओं में बाधा आई, उनका उपयोग यूक्रेनी सैनिक रूसी सैन्य कार्रवाइयों से अपने इलाके की रक्षा में कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रूस के आक्रामक हमलों से बचाव और यूक्रेन को अमेरिकी समर्थन, दोनों के लिहाज से यह सेवा बेहद अहम है। उन्होंने इसे जल्द से जल्द पूरी तरह बहाल करने की मांग की।
सीनेटर केविन क्रेमर हाल ही में यूक्रेन का दौरा कर चुके हैं और राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात भी की थी। उन्होंने भी जांच की मांग का समर्थन किया। उसी सीबीएस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जांचकर्ताओं को यह तय करना होगा कि रुकावट सोच-समझकर लिए गए किसी फैसले का नतीजा थी या महज तकनीकी खराबी। फिलहाल दोनों पक्षों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। एक तरफ प्रशासन कहता है कि कोई आदेश नहीं दिया गया, दूसरी तरफ जेलेंस्की के संकेत और सांसदों की चिंता हैं। ऐसे में कांग्रेस की जांच ही यह साफ कर सकती है कि सच क्या है। तब तक यूक्रेनी मोर्चे पर तैनात सैनिक उसी अनिश्चित संचार व्यवस्था के सहारे हैं, जिस पर उनकी सुरक्षा टिकी है।
























