अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों को बड़ी राहत दी है। उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ के तहत प्रस्तावित भारी शुल्क फिलहाल रोक दिए हैं। इससे भारत समेत पांच बड़े खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक का टैरिफ लगने का खतरा टल गया है। ट्रंप के इस कदम को मध्यवर्ती चुनावों के मध्यनजर देखा जा रहा है। ट्रंप ने सितंबर के मध्य में इस कानून पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें प्रावधान था कि रूसी कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस सबसे ज्यादा खरीदने वाले पांच देशों के सामान पर अमेरिका 100 प्रतिशत तक शुल्क लगा सकता है। रूस पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देश भी इसके दायरे में आ सकते थे। वहीं रूसी वस्तुओं पर शुल्क 500 प्रतिशत तक बढ़ाने की व्यवस्था थी। इन पांच देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। अगस्त में अमेरिकी सीनेट ने इस विधेयक को 86-11 के भारी बहुमत से पारित किया था।
ट्रंप को किसी भी प्रतिबंध या शुल्क को माफ करने का अधिकार देने वाली कानून की धारा 115 का इस्तेमाल करने की इजाजत देता है। बता दें कि टेरिफ लागू होने से ठीक एक दिन पहले यह आदेश जारी हुआ है। हालांकि अभी भी निगरानी खत्म नहीं हुई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि अन्य विभागों के साथ मिलकर रूसी तेल-गैस की खरीद पर नजर रखेंगे और राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंपेंगे। इस फैसले से कुछ दिन पहले ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका रूस से डीजल खरीदेगा, ताकि वैश्विक ऊर्जा कीमतें काबू में रहें। उन्होंने इसे “बड़ा सौदा” बताया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी वैश्विक बाजार की स्थिरता को लेकर अपना रुख दोहराया है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रियायती रूसी तेल का बड़ा खरीदार रहा है, और यही वाशिंगटन के साथ तनाव की वजह बना। पिछले साल अगस्त में भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाया गया था, जिसे फरवरी में अंतरिम व्यापार समझौते के बाद हटा लिया गया। ताजा राहत से भारतीय निर्यातकों और तेल कंपनियों को कुछ सुकून मिलेगा। फिर भी यह रोक अस्थायी है, इसलिए भविष्य में नीति बदलने की आशंका बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आपूर्ति के कई स्रोत बनाए रखने होंगे, ताकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव का असर कम से कम पड़े।
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