नई दिल्ली: भारत के सैन्य इतिहास से जुड़े सबसे चर्चित अभियानों में से एक ‘Operation Sindoor’ एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि उन छह वीर सैनिकों को मिली आधिकारिक पहचान है, जिन्होंने इस ऑपरेशन के दौरान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। ऑपरेशन के एक साल से भी अधिक समय बाद केंद्र सरकार ने पहली बार इन शहीदों के नाम सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दर्ज किए हैं। Operation Sindoor
दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) के ‘त्याग चक्र’ की 3D दीवार पर अब उन छह वीर जवानों के नाम अंकित हैं, जिन्होंने मई 2025 में पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष के दौरान अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। हालांकि, इस सम्मान के साथ ही एक नया राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है, क्योंकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने इन शहीदों की जानकारी एक साल तक सार्वजनिक नहीं की और उनकी शहादत को उचित सम्मान देने में देरी की। Operation Sindoor
पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था Operation Sindoor दरअसल, 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। इस घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया और आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठने लगी। Operation Sindoor
इसके जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने Operation Sindoor शुरू किया। इस सैन्य अभियान के तहत भारतीय सेना, वायुसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद नौ आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए। इन ठिकानों का संबंध कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों से बताया गया था। भारत ने इसे आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक कार्रवाई करार दिया था। Operation Sindoor
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सरकार ने लंबे समय तक नहीं दी थी शहीदों की जानकारी ऑपरेशन के बाद लगातार ऐसी खबरें सामने आती रहीं कि इस कार्रवाई के दौरान भारतीय सेना के कुछ जवान शहीद हुए हैं। हालांकि, सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई। न तो शहीदों के नाम बताए गए और न ही उनकी संख्या की पुष्टि की गई।इस मुद्दे पर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा और आरोप लगाता रहा कि शहीद सैनिकों की जानकारी जानबूझकर छिपाई जा रही है। कई राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए कि देश के लिए बलिदान देने वाले जवानों को आखिर सार्वजनिक रूप से सम्मान देने में इतनी देरी क्यों हुई। Operation Sindoor
लोकसभा में क्या बोले थे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह? जुलाई 2025 में संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने Operation Sindoor पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि जिन आतंकियों ने हमारी बहनों और बेटियों का सिंदूर उजाड़ा था, उन्हें भारतीय सेना ने करारा जवाब दिया है और उनके आकाओं का भी सफाया किया गया है।उन्होंने सदन में यह भी कहा था कि यदि कोई सवाल पूछना चाहता है तो यह पूछे कि क्या Operation Sindoor के दौरान हमारे किसी बहादुर सैनिक को नुकसान पहुंचा? उनका जवाब था— “नहीं, हमारे किसी भी सैनिक को नुकसान नहीं हुआ।” हालांकि, बाद में सरकार ने केवल इतना स्वीकार किया कि अभियान के दौरान कुछ “कैजुअल्टी” हुई थीं, लेकिन न तो शहीदों के नाम सार्वजनिक किए गए और न ही उनकी संख्या बताई गई। इसी बात को लेकर सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर रही। Operation Sindoor
अब सामने आए छह शहीदों के नाम अब राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जिन छह वीर सैनिकों के नाम दर्ज किए गए हैं, वे हैं—
– सूबेदार मेजर पवन कुमार (भारतीय सेना)
– राइफलमैन सुनील कुमार (वीर चक्र) (भारतीय सेना)
– लांस नायक दिनेश कुमार (भारतीय सेना)
– अग्निवीर मूड मुरलीनायक (भारतीय सेना)
– हवलदार सुनील कुमार सिंह (भारतीय सेना)
– सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (भारतीय वायुसेना)
इनमें पांच जवान भारतीय सेना से और एक भारतीय वायुसेना से थे। इन सभी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। Operation Sindoor
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर मिला अमर सम्मान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर किसी सैनिक का नाम दर्ज होना देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों में से एक माना जाता है। यहां उन्हीं वीर सैनिकों के नाम अंकित किए जाते हैं जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी हो। अब इन छह सैनिकों के नाम भी हमेशा के लिए इस स्मारक का हिस्सा बन गए हैं और आने वाली पीढ़ियां उनके साहस, वीरता और देशभक्ति को याद करेंगी।
एक बार फिर तेज हुई राजनीतिक बहस शहीदों के नाम सार्वजनिक होने के बाद यह मामला फिर से राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष का कहना है कि यदि ये सैनिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए थे तो सरकार ने एक साल तक उनके नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किए। वहीं, सरकार की ओर से अभी तक इस देरी को लेकर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। Operation Sindoor
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राजनितिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक बात स्पष्ट है कि देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले इन वीर सैनिकों का बलिदान अमूल्य है। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर उनके नाम अंकित होने के साथ ही उनका साहस और समर्पण हमेशा के लिए भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। देश उनके सर्वोच्च बलिदान को सदैव नमन करता रहेगा। Operation Sindoor


