लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख Mayawati ने पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और खासकर दलित, पिछड़े, आदिवासी व अन्य उपेक्षित वर्गों के लोगों को बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को भावनाओं में बहकर ऐसे आंदोलनों का हिस्सा बनने से बचना चाहिए, जिनसे उनका नुकसान हो। अगर अपने अधिकारों को स्थायी रूप से सुरक्षित करना है तो लोकतांत्रिक तरीके अपनाने होंगे और वोट की ताकत को समझना होगा।
Mayawati ने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपने अधिकारों की रक्षा करने का हक देता है। इसलिए किसी भी तरह के संघर्ष या विरोध को कानून और संविधान की सीमा में रहकर ही करना चाहिए। उनका कहना था कि समाज के लोगों को अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि सत्ता में भागीदारी ही लंबे समय तक बदलाव ला सकती है। Mayawati
“सिर्फ आंदोलन से नहीं, राजनीतिक ताकत से बदलती है तस्वीर”
बसपा प्रमुख ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि केवल सड़क पर उतरकर आंदोलन करने से हर समस्या का हल नहीं निकलता। आंदोलन अपनी जगह जरूरी हो सकते हैं, लेकिन जब तक समाज की राजनीतिक भागीदारी मजबूत नहीं होगी, तब तक फैसले लेने की ताकत दूसरों के हाथ में ही रहेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे लोगों को जागरूक करें, उन्हें मतदान के महत्व के बारे में बताएं और समाज को एकजुट करने का काम करें। उनका कहना था कि संगठित वोट ही किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होता है। Mayawati
संविधान के दायरे में रहकर लड़ें अधिकारों की लड़ाई
मायावती ने अपने संदेश में कहा कि किसी भी वर्ग को अपने अधिकारों के लिए लड़ाई जरूर लड़नी चाहिए, लेकिन यह लड़ाई संविधान और कानून के दायरे में रहकर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भावनाओं में आकर ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए, जिनका फायदा दूसरे लोग उठा लें और नुकसान समाज को झेलना पड़े।उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे लोगों के बीच जाकर संविधान के प्रति जागरूकता फैलाएं और उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा भाग लेने के लिए प्रेरित करें। Mayawati
कार्यकर्ताओं को संगठन मजबूत करने का दिया संदेश
बसपा प्रमुख ने पार्टी संगठन को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वह बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करे और समाज के हर वर्ग तक पार्टी की नीतियों और विचारों को पहुंचाए।उन्होंने कहा कि अगर समाज संगठित होकर अपने वोट का सही इस्तेमाल करेगा तो राजनीतिक भागीदारी भी बढ़ेगी और सरकारों में उसकी आवाज पहले से ज्यादा मजबूत होगी। इससे समाज के हितों से जुड़े फैसलों पर भी असर पड़ेगा। Mayawati
“वोट ही सबसे बड़ा लोकतांत्रिक हथियार”
मायावती ने कहा कि लोकतंत्र में वोट से बड़ी कोई ताकत नहीं होती। अगर समाज अपने मताधिकार का सोच-समझकर और एकजुट होकर इस्तेमाल करे तो राजनीतिक बदलाव संभव है। उन्होंने कहा कि अधिकारों की स्थायी सुरक्षा तभी होगी, जब समाज निर्णय लेने वाली व्यवस्था में अपनी मजबूत हिस्सेदारी बनाएगा।उन्होंने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि वे लोगों के बीच भाईचारा, सामाजिक एकता और राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने का काम करें। उनका मानना है कि संगठित समाज और मजबूत राजनीतिक भागीदारी ही सामाजिक न्याय और बराबरी की दिशा में सबसे प्रभावी रास्ता है।


