झांसी मंडलीय चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत सवालों के घेरे में है। अस्पताल की एक्सरे मशीन कई दिनों से खराब पड़ी है, तो दूसरी तरफ जन औषधि केंद्र पर मरीजों के साथ नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। Nation 27 की टीम ने जब मौके पर पहुंचकर रियलिटी चेक किया, तो कई चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं।
झाँसी मंडलीय चिकित्सालय में मरीजों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। अस्पताल की एक्सरे मशीन पिछले कई दिनों से खराब पड़ी है। इसके बावजूद हड्डी टूटने और चोटिल मरीजों को प्लास्टर चढ़ाया जा रहा है। ऐसे में बिना एक्सरे के उपचार किए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं या बाहर से एक्सरे कराये जा रहे हैं।
Nation 27 की टीम ने अस्पताल परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र का भी रियलिटी चेक करते हुए दवा खरीदने वाले लोगों से बात करने पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अस्पताल में एक रुपये की पर्ची पर इलाज कराने पहुंचे मरीजों से दवाइयों के पैसे तो लिए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो कच्चा बिल दिया जा रहा है और न ही पक्का बिल, इतना ही नहीं, खुल्ले पैसे वापस करने के बजाय मरीजों को टॉफी थमा दी जा रही हैं।
जब इस पूरे मामले पर अस्पताल के मुख्य चिकित्सालय के प्रमुख अधीक्षक डॉक्टर आरके सक्सेना से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि शुक्रवार से खराब एक्सरे मशीन को जल्द ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है। मरीजों बिना एक्सरे के प्लास्टर चढाने पर उन्होंने कहा कि वह इस बात की जानकारी करेगे की जिन मरीजों के एक्सरे हो चुके थे, उनको प्लास्टर चढ़ाया जा रहा है या नए मरीज़ है।
अस्पताल परिसर में स्थित जन औषधि केंद्र पर बिना बिल दवा देने और खुल्ले पैसे के बदले टॉफी देने के मामले को गंभीर बताते हुए उन्होंने कहा कि स्टेट हेड एजेंसी की मुख्य कार्यपालक अधिकारी को इससे संबंधित पत्र लिखा जाएगा कि वह औषधि केंद्र के संचालक को निर्देशित करे कि सभी दवा खरीददारों को बिल अवश्य दें। औषधि केंद्र द्वारा खुल्ले पैसों के बदले टॉफी देने पर उन्होंने मरीजों से यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने की अपील की है।
सरकारी अस्पतालों में मरीज बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन जब एक्सरे जैसी बुनियादी सुविधा ठप हो और दवा खरीदने पर बिल तक न मिले, तो व्यवस्थ सेवाओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस रियलिटी चेक के बाद कितनी जल्दी व्यवस्था में सुधार करता है।
रिपोर्ट- हेमंत कुमार गुप्ता (झांसी)/सोनू सिंह


