जिले के क्रिकेट जगत से जुड़ा एक बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। अलीगढ़ की अपर सिविल जज की अदालत ने अलीगढ़ डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन के नाम और पहचान को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने स्थायी निषेधाज्ञा देते हुए अनाधिकृत लोगों और संस्थाओं को एसोसिएशन के नाम या इससे मिलते-जुलते नामों का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है।
मामला अलीगढ़ डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से उसके निर्वाचित सचिव प्रदीप सिंह के माध्यम से दायर किया गया था। एसोसिएशन ने आरोप लगाया था कि कुछ लोग संस्था के नाम और पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। मामले में सैयद अब्दुल वहाब, अब्दुल लतीफ खान, सैयद मुताहिर जैदी, फसाहत अली और विवेक बंसल को पक्षकार बनाया गया था।
सुनवाई के दौरान एसोसिएशन ने अदालत में दस्तावेज पेश कर बताया कि वह सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत संस्था है और इसकी वैध प्रबंधकारिणी समिति लंबे समय से क्रिकेट गतिविधियों का संचालन कर रही है।
वहीं, प्रतिवादी पक्ष ने अदालत में कहा कि वह अब अलीगढ़ डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन नाम का उपयोग नहीं कर रहा है और उसने अपनी गतिविधियों के लिए अलग नाम अपना लिया है।
अदालत ने सभी दस्तावेजों और पक्षों की दलीलों के आधार पर माना कि अलीगढ़ डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन ही इस नाम की एकमात्र वैध पंजीकृत संस्था है।
पीठासीन न्यायाधीश महिमा सिंह ने अपने आदेश में कहा कि प्रतिवादी, उनके सहयोगी, एजेंट और कर्मचारी भविष्य में अलीगढ़ डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन या यूपीसीए विंग अलीगढ़ डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन जैसे मिलते-जुलते नामों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
22 मई 2026 को पारित इस फैसले को जिले के क्रिकेट खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस आदेश से जिले में क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता आएगी और खिलाड़ियों को एक मान्यता प्राप्त संस्था के माध्यम से बेहतर अवसर मिल सकेंगे।


