Supreme Court: देश की सर्वोच्च अदालत में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने और न्यायिक प्रक्रिया को और तेज बनाने की दिशा में संसद ने एक अहम कदम उठाया है। बुधवार को राज्यसभा ने Supreme Court (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा से भी पास हो चुका था। दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भी शामिल हैं। इस विधेयक को केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में पेश किया। लोकसभा में यह बिल सोमवार को ध्वनिमत से पारित हुआ था।
2019 के बाद पहली बार बढ़ी जजों की संख्या
यह बदलाव साल 2019 के बाद पहली बार किया गया है। इससे पहले मई 2026 में केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश (ऑर्डिनेंस) जारी कर Supreme Court में जजों की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया था। अब उसी अध्यादेश की जगह यह विधेयक संसद से पारित होकर कानून बनने की प्रक्रिया पूरी कर चुका है। सरकार का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए जजों की संख्या बढ़ाना जरूरी था। इससे मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।
सिर्फ जज बढ़ाने से नहीं होगा काम, इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत करना होगा
विधेयक पर चर्चा के दौरान बीजू जनता दल (BJD) के सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि केवल जजों की संख्या बढ़ा देना काफी नहीं है। अगर अदालतों का ढांचा मजबूत नहीं होगा तो न्याय व्यवस्था पर इसका पूरा असर नहीं दिखेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ मिलकर Supreme Court और हाईकोर्टों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर भी गंभीरता से काम करे। उनका कहना था कि देश की न्यायपालिका को आधुनिक सुविधाएं देना उतना ही जरूरी है जितना नए जजों की नियुक्ति करना।
सुप्रीम कोर्ट को चाहिए नए कोर्टरूम और जजों के चैंबर
सस्मित पात्रा ने सदन में बताया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा 12 मई को एक ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी कमेटी बनाई गई थी। इस समिति का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट और देशभर के हाईकोर्टों में इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों का आकलन करना है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट की जरूरतों को लेकर विस्तार से जानकारी दी थी। उनके मुताबिक अदालत में 27 नए कोर्टरूम, 51 जजों के चैंबर, 4 रजिस्ट्रार कोर्टरूम, 16 रजिस्ट्रार चैंबर, Supreme Court बार एसोसिएशन के लिए नई लाइब्रेरी और वकीलों के संगठनों के लिए अलग कार्यालयों की आवश्यकता है।
वकीलों के लिए भी जगह की कमी
बहस के दौरान सस्मित पात्रा ने वकीलों के चैंबर की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि फिलहाल 234 चैंबरों में 468 वकील काम कर रहे हैं, जबकि जरूरत कम से कम 400 से 500 चैंबरों की है। उन्होंने कानून मंत्री से आग्रह किया कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की लंबे समय से चली आ रही अतिरिक्त स्थान की मांग पर भी जल्द फैसला लिया जाए, ताकि वकीलों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सके।
न्यायपालिका पर संसद का भरोसा
अपने संबोधन के अंत में सस्मित पात्रा ने कहा कि यह सिर्फ जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल नहीं है, बल्कि संसद की ओर से देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था पर भरोसे का एक मजबूत संदेश भी है। उन्होंने कहा कि जब भारत के लोकतंत्र का इतिहास लिखा जाएगा, तब Supreme Court की भूमिका हमेशा गर्व के साथ याद की जाएगी। उनका कहना था कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सर्वोच्च अदालत को मजबूत बनाना देश के संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
लोगों को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि Supreme Court में जजों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आने की संभावना है। इससे बड़े संवैधानिक मामलों के साथ-साथ आम लोगों से जुड़े मामलों का भी जल्दी निपटारा हो सकेगा। हालांकि, कई सांसदों का यह भी मानना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। अदालतों में आधुनिक सुविधाएं, पर्याप्त कोर्टरूम, बेहतर तकनीकी व्यवस्था और वकीलों के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित करना उतना ही जरूरी है, ताकि न्याय व्यवस्था वास्तव में अधिक प्रभावी और मजबूत बन सके।


