महाराष्ट्र के हिंगोली जिले से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक Abhijeet Dipke ने सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत कर दी है। अपने गांव से शुरू किए गए इस अभियान के जरिए दीपके सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, प्रशासनिक लापरवाही और बच्चों को मिल रही सुविधाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों की समस्याओं को केवल कागजों में दर्ज करने से हालात नहीं बदलेंगे, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करनी होगी।
इसी अभियान के तहत Abhijeet Dipke ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में उन्होंने गांव के सरकारी स्कूल से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं का मुद्दा उठाया। दीपके ने दावा किया कि ग्रामीण लंबे समय से स्कूल के प्रिंसिपल को लेकर शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रिंसिपल को लेकर ग्रामीणों ने की शिकायत, कार्रवाई पर सवाल
Abhijeet Dipke के मुताबिक, ग्रामीणों ने स्कूल के प्रिंसिपल की कथित शराब की लत को लेकर कई बार वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल के प्रधानाचार्य के व्यवहार और कार्यप्रणाली को लेकर लगातार समस्याएं सामने आती रही हैं। इसके बावजूद शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। दीपके ने इस पूरे मामले को सिर्फ एक व्यक्ति से जुड़ा मुद्दा नहीं बताया, बल्कि इसे सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और प्रशासन की जवाबदेही से जोड़कर देखा। उनका कहना है कि स्कूल ऐसी जगह है जहां बच्चों का भविष्य तैयार होता है। अगर वहां की व्यवस्था ही ठीक नहीं होगी तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा।
मंगलवार तक का अल्टीमेटम, नहीं हटे प्रिंसिपल तो आंदोलन में होंगे शामिल
वीडियो के जरिए Abhijeet Dipke ने संबंधित अधिकारियों को साफ चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि अगर मंगलवार तक स्कूल के प्रिंसिपल को पद से नहीं हटाया गया, तो वह खुद ग्रामीणों के साथ विरोध-प्रदर्शन में शामिल होंगे। दीपके के इस बयान के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है। उन्होंने संकेत दिया है कि अगर प्रशासन ने ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। उनका कहना है कि ग्रामीणों की समस्याओं को नजरअंदाज करके प्रशासन चुप नहीं बैठ सकता।
पांच कक्षाओं के लिए सिर्फ दो शिक्षक, पढ़ाई पर बड़ा सवाल
Abhijeet Dipke ने स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, स्कूल में पांच कक्षाओं के लिए महज दो शिक्षक मौजूद हैं। ऐसे में सभी कक्षाओं के बच्चों को पर्याप्त समय और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि एक सरकारी स्कूल में बच्चों की संख्या और कक्षाओं के हिसाब से पर्याप्त शिक्षक होना जरूरी है। अगर एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़े, तो पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन बच्चों को उठाना पड़ता है जिनके परिवार निजी स्कूलों की महंगी फीस वहन नहीं कर सकते।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के जरिए व्यवस्था पर निशाना
दीपके लगातार सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। अब उन्होंने अपने गांव से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर इस मुद्दे को जमीनी स्तर पर उठाने का दावा किया है। उनका फोकस स्कूलों में मौजूद वास्तविक समस्याओं को सामने लाने और प्रशासन से जवाब मांगने पर है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी उसी बेहतर शिक्षा और सुविधाओं के हकदार हैं जो दूसरे बच्चों को मिलती हैं। स्कूल में शिक्षक, अनुशासन और उचित शैक्षणिक माहौल जैसी बुनियादी चीजों की कमी को किसी भी हालत में सामान्य नहीं माना जा सकता।
यह भी पढ़ें: 15 अगस्त पर PM मोदी का खास संबोधन, लाल किले से 13वीं बार सुनाएंगे देश के नाम संदेश
वीडियो शेयर कर प्रशासन से मांगा जवाब
Abhijeet Dipke ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए इस मामले को लोगों के सामने रखा है। वीडियो के जरिए उन्होंने ग्रामीणों की शिकायतों और स्कूल की स्थिति को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित शिक्षा विभाग और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। मंगलवार तक दिए गए अल्टीमेटम के बाद अगर कार्रवाई नहीं होती है, तो दीपके और ग्रामीणों का अगला कदम क्या होगा, इस पर भी नजर रहेगी। फिलहाल ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के जरिए सरकारी स्कूलों की व्यवस्था का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।


