नई दिल्ली। देश 15 अगस्त को आजादी का पर्व मनाने जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करेंगे। यह लगातार 13वीं बार होगा, जब पीएम मोदी लाल किले से देशवासियों के सामने अपना संबोधन रखेंगे।
हर साल उनके भाषण में सरकार की उपलब्धियों, भविष्य की योजनाओं और देश के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र देखने को मिलता है। प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2014 में पहली बार लाल किले से तिरंगा फहराकर देश को संबोधित किया था। इसके बाद से हर स्वतंत्रता दिवस पर उनका संबोधन देश की राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का अहम हिस्सा रहा है।
2014 से शुरू हुआ लाल किले का सफर
नरेंद्र मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। उनका पहला स्वतंत्रता दिवस भाषण करीब 65 मिनट लंबा था। इसके बाद उनके भाषणों की अवधि में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2015 में उन्होंने करीब 86 मिनट तक देश को संबोधित किया।
2016 में उनका भाषण सबसे लंबा रहा और उन्होंने लगभग 94 मिनट तक अपनी बात रखी। वहीं 2017 में उनका भाषण काफी छोटा रहा। उस साल पीएम मोदी ने करीब 56-57 मिनट में अपना संबोधन पूरा किया, जो अब तक उनके लाल किले के भाषणों में सबसे छोटा माना जाता है। इसके बाद 2018 में उन्होंने करीब 82 मिनट, 2019 में 92 मिनट, 2020 में 86 मिनट, 2021 में 88 मिनट, 2022 में 83 मिनट और 2023 में करीब 90 मिनट तक देश को संबोधित किया।
2015 में टूटा था जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड
लाल किले से लंबे भाषण देने के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में एक खास रिकॉर्ड अपने नाम किया था। उन्होंने उस साल 86 मिनट तक भाषण देकर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लंबे भाषण का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया था। नेहरू ने 1947 में स्वतंत्र भारत के पहले स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से करीब 72 मिनट तक भाषण दिया था। हालांकि, भाषण की अवधि के अलावा दोनों प्रधानमंत्रियों के संबोधन अपने-अपने दौर की परिस्थितियों और देश की प्राथमिकताओं को भी दर्शाते हैं।
नेहरू के नाम सबसे ज्यादा बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड
लाल किले की प्राचीर से सबसे ज्यादा बार राष्ट्रीय ध्वज फहराने का रिकॉर्ड अभी भी जवाहरलाल नेहरू के नाम है। वह 1947 से 1964 तक देश के प्रधानमंत्री रहे और इस दौरान उन्होंने 17 बार लाल किले पर तिरंगा फहराया। उनके बाद इस सूची में इंदिरा गांधी का नाम आता है। देश की पहली और अब तक की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लाल किले से 16 बार तिरंगा फहराया। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सूची में आगे हैं। दोनों नेताओं ने लाल किले की प्राचीर से 10-10 बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया है।
इन दो प्रधानमंत्रियों को नहीं मिला लाल किले पर तिरंगा फहराने का मौका
भारत के राजनीतिक इतिहास में दो ऐसे प्रधानमंत्री भी रहे, जिन्हें प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से तिरंगा फहराने का अवसर नहीं मिला। इनमें पहला नाम गुलजारीलाल नंदा का है। वह दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने। पहली बार जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद 27 मई 1964 को और दूसरी बार लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद जनवरी 1966 में उन्होंने कार्यवाहक प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
दोनों बार उनका कार्यकाल करीब 13-13 दिनों का रहा। दूसरा नाम चंद्रशेखर का है, जो नवंबर 1990 से जून 1991 तक प्रधानमंत्री रहे। उनका कार्यकाल भी ऐसा रहा कि उन्हें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराने का मौका नहीं मिल पाया।
इस बार फिर लाल किले से देश को संबोधित करेंगे पीएम मोदी
अब 15 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से 13वीं बार देश को संबोधित करेंगे। ऐसे में उनके भाषण की अवधि के साथ-साथ इस बात पर भी नजर रहेगी कि वह देश के लिए किन नई योजनाओं, नीतियों और लक्ष्यों का ऐलान करते हैं। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस संबोधन सिर्फ सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि यह आने वाले समय के लिए सरकार की प्राथमिकताओं और देश के विजन की तस्वीर भी पेश करता है। इस बार भी देशवासियों की नजर पीएम मोदी के संबोधन और उनके संदेश पर टिकी होगी।


