पूर्व सांसद राजाराम पाल का पुतला फूंके जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। दरअसल ब्राह्मण समाज और रामचरितमानस को लेकर की गई कथित टिप्पणी से नाराज बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पूर्व सांसद राजाराम पाल का पुतला दहन किया था। इस घटना के सामने आते ही पाल-बहुजन समाज में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला और समाज के लोगों ने इसे अपनी अस्मिता पर सीधा हमला बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।
पुतला दहन की घटना के विरोध में अखिल भारतीय पाल महासभा समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों ने माती मुख्यालय में एकजुट होकर बड़ा विरोध मार्च निकाला। बड़ी संख्या में समाज के लोग हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सड़कों पर उतरे और घटना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि किसी जनप्रतिनिधि का इस तरह सरेआम पुतला फूंकना न सिर्फ असामाजिक कृत्य है, बल्कि यह पूरे पाल समाज के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली घटना है।
विरोध मार्च के बाद प्रदर्शनकारी सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और वहां संबंधित अधिकारियों को अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में साफ तौर पर कहा गया कि पूर्व सांसद राजाराम पाल का पुतला फूंकने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से यह भी अपील की कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
प्रदर्शनकारी संगठनों ने अकबरपुर और मैथा में हुई इन घटनाओं की निष्पक्ष और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग रखी। उनका कहना था कि जब तक इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक समाज में पनप रहा आक्रोश कम नहीं होगा। साथ ही यह भी मांग की गई कि घटनास्थल के आसपास मौजूद सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो के आधार पर आरोपियों की सही पहचान की जाए और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
रिपोर्ट- गौरव शुक्ला/सोनू सिंह (कानपुर देहात)


