दिल्ली की सियासत में शुक्रवार को उस समय हलचल मच गई, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी अपने साथ पैलेट गन पीड़ित साहिल लोचब और उनके परिवार को भी लेकर पहुंचे थे। दरअसल यह मामला जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ा है, जिसमें साहिल गंभीर रूप से घायल हो गए थे। राहुल गांधी शुरुआत में कनॉट प्लेस थाने पहुंचे थे, लेकिन बाद में एफआईआर दर्ज कराने के मकसद से वह संसद मार्ग थाने स्थित डीसीपी कार्यालय पहुंच गए।
साहिल लोचब का आरोप है कि 20 जुलाई की घटना को लेकर वह लगातार पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी शिकायत पर औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। राहुल गांधी ने डीसीपी कार्यालय में करीब 40 से 45 मिनट तक अधिकारियों के साथ बैठक कर मामले की जांच की स्थिति के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों से सीधे सवाल किया कि आखिर पीड़ित की शिकायत पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और जांच किस चरण में पहुंची है।
दूसरी ओर दिल्ली पुलिस का कहना है कि 20 जुलाई की इस घटना की जांच पहले से ही क्राइम ब्रांच को सौंपी जा चुकी है। पुलिस के अनुसार साहिल की शिकायत की प्रति ले ली गई है और उसे संबंधित जांच अधिकारी को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपा जाएगा। हालांकि पुलिस के इस स्पष्टीकरण के बावजूद राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी इस बात पर अड़े हुए हैं कि जब तक औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।
राहुल गांधी के करीबी सूत्रों के मुताबिक, जब तक पैलेट गन मामले में साहिल की एफआईआर दर्ज नहीं हो जाती, तब तक राहुल गांधी थाने के बाहर से नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि एक निर्दोष व्यक्ति के घायल होने के बावजूद पुलिस की सुस्त कार्यशैली सवालों के घेरे में है और पीड़ित को न्याय दिलाना जरूरी है। धरने के दौरान राहुल गांधी लगातार साहिल और उनके परिवार के साथ मौजूद रहे और मामले को गंभीरता से उठाते नजर आए।


