लखनऊ: साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी से लगातार दूसरी बार करारी शिकस्त मिलने के बाद अखिलेश यादव राज्य में अपनी राजनीति बचाए रखने का नया फॉर्मूला ढूंढ रहे थे। तमाम पैतरों को आजमाने के बाद लोकसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले यानी की जून 2023 में अखिलेश ने नई रणनीति अपनाई।
समाजवादी पार्टी पर से मुस्लिमों-यादवों की पार्टी का ठप्पा हटाने के लिए उन्होंने PDA का फॉर्मूला दिया। इसका मतलब था पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक को पार्टी से जोड़ना, अखिलेश यादव 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी फॉर्मूले के साथ चुनावी मैदान में उतरे और टिकट बंटवारे में भी इसका इस्तेमाल किया।
अखिलेश कितनी बार बदल चुके हैं PDA का मतलब
लोकसभा चुनाव 2024 में अखिलेश यादव को इस फॉर्मूले से उम्मीद से ज्यादा सफलता मिली और 37 सीटों पर पार्टी ने शानदार जीत हासिल की. इसके बाद उन्होंने हर मौके, हर रैली, हर कार्यक्रम में पीडीए को दोहराना शुरू कर दिया। लेकिन अब वो इसको लेकर कन्फ्यूज नजर आते हैं.
दरअसल जब अखिलेश यादव के पीडीए में ‘ए’ यानी अल्पसंख्यक को बीजेपी ने मुस्लिम तुष्टिकरण से जोड़कर हिन्दु वोटों को एकजुट करने की कोशिश की तो उसके बाद अखिलेश समय-समय पर पीडीए का मतलब बदलने लगे।
2025 में PDA की नई परिभाषा
बीजेपी हिंदू वोटों का ध्रवीकरण ना कर सके इसके लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने साल 2025 में PDA की नई परिभाषा गढ़ दी जिसके बाद इसे पीड़ित, दुखी, आदिवासी से जोड़ने लगे।
इसके बाद उन्होंने पीडीए में ए को आदिवासी से बदलकर महिला से जोड़ दिया और ए को आधी आबादी यानी की महिलाओं की भूमिका पर केंद्रित बताने लगे. इसमें अगली जाति की महिला वोटरों को भी साधने की कोशिश की.
अभी हाल ही में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान जब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए अखिलेश यादव के पीडीए के P को पाकिस्तान से जोड़ दिया तो पार्टी बैकफुट पर आ गई.
2026 में पीडीए का नया मतलब बताया
इसके बाद समाजवादी पार्टी पीडीए का नया मतलब लोगों को समझाने में जुट गई. प्रदेश की तमाम राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश करते हुए पीडीए में P को ‘पीड़ित पंडित’ (ब्राह्मण समुदाय) के तौर पर शामिल कर दिया. इसके अलावा इसे PDA को ‘Patience, Discipline, Action’ जैसे अंग्रेजी शब्दों से जोड़ते हुए हिन्दी में इसका मतलब धैर्य, अनुशासन और कार्रवाई के रूप में परिभाषित कर दिया. अब सवाल उठता है कि अखिलेश आखिर पीडीए को लेकर इतने कन्यूज क्यों हैं.
PDA को लेकर कन्फ्यूजन है या यही सॉल्यूशन
इसका जवाब ये है कि अखिलेश यादव पूरी कोशिश में जुटे हैं कि किसी भी कीमत पर इस बार वो बीजेपी को तीसरी बार सत्ता में आने से रोक सकें. इसलिए अखिलेश यादव की नजर अपने पारंपरिक वोटों के अलावा, ओबीसी, सवर्ण और तमाम उन वोटर्स पर है जो अब तक बीजेपी के वफादार माने जाते रहे हैं।
यही वजह है कि मौका और परिस्थिति देखकर अखिलेश यादव पीडीए का शाब्दिक मतलब अपने फायदे के लिए बदलते रहते हैं। जहां उन्हें ब्राह्मण और सवर्णों को साधना होता है वहां P का मतलब पीड़ित पंडित बताते हैं और जहां मुस्लिम को साधना होता है वहां ए को अल्पसंख्यक से जोड़ देते हैं। जहां आदिवासियों की बात करनी होती है वहां A को आदिवासियों से जोड़ देते हैं।
रिपोर्ट: कुणाल कौशल


