प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने घरेलू दौरों के दौरान काफिले का आकार घटाने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री ने SPG से कहा है कि उनके आधिकारिक काफिले में गाड़ियों की संख्या करीब 50 प्रतिशत तक कम की जाए। यह फैसला सरकारी खर्च कम करने, ईंधन की बचत और सादगी का संदेश देने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
घरेलू यात्राओं में छोटा होगा PM का काफिला
नई व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री के देश के भीतर होने वाले दौरों में काफिले का आकार पहले के मुकाबले छोटा रखा जाएगा। हालांकि यह बदलाव सुरक्षा प्रोटोकॉल को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि गैर-जरूरी वाहनों की संख्या कम करने के लिए किया गया है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सुरक्षा से जुड़े जरूरी वाहन और SPG की व्यवस्था पहले की तरह कायम रहेगी।
SPG सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं
प्रधानमंत्री की सुरक्षा देश की सबसे उच्च स्तरीय सुरक्षा व्यवस्थाओं में शामिल है। इसलिए काफिले में कटौती के बावजूद SPG सुरक्षा में कोई कमी नहीं की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही वाहनों की संख्या तय की जाएगी। यानी संदेश सादगी का होगा, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत रहेगी।
EV गाड़ियों को बढ़ाने पर जोर
प्रधानमंत्री ने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने की भी बात कही है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, PM मोदी ने SPG से कहा है कि काफिले में EVs को प्राथमिकता दी जाए, लेकिन इसके लिए नई गाड़ियां खरीदने से बचा जाए। यानी पहले से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकारी खर्च कम करने का संदेश
इस फैसले को सिर्फ प्रधानमंत्री के काफिले तक सीमित कदम नहीं माना जा रहा है। इसे सरकार के भीतर व्यापक austerity push यानी खर्च में संयम की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री का यह कदम अन्य केंद्रीय विभागों, मंत्रियों और राज्यों के लिए भी संकेत माना जा रहा है कि सरकारी संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाए।
कई राज्यों ने भी शुरू किए कदम
प्रधानमंत्री के इस फैसले के बाद कुछ राज्यों और नेताओं ने भी अपने स्तर पर वाहनों के इस्तेमाल को लेकर सख्ती या कटौती की दिशा में कदम उठाए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली और मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों में सरकारी वाहनों और काफिलों को लेकर नए निर्देशों पर चर्चा तेज हुई है।
राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश
PM मोदी का यह फैसला ऐसे समय आया है जब सरकारी खर्च, ईंधन बचत और प्रशासनिक सादगी को लेकर चर्चा बढ़ रही है। काफिले में कटौती से एक ओर संसाधनों की बचत का संदेश जाएगा, वहीं दूसरी ओर यह भी संकेत मिलेगा कि शीर्ष नेतृत्व खुद से शुरुआत कर रहा है। आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर ऐसे और कदम देखने को मिल सकते हैं।


