Uttarpradeshnews: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्रामीण विकास को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने ग्राम्य विकास विभाग को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के हर गाँव और मजरे तक विकास के नए अवसर पहुँचाए जाएँ। इसके साथ ही उप मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास विभाग को स्पष्ट रूप से कहा कि प्रदेश की बंजर भूमि को चिन्हित कर उसे ‘अमृत सरोवर’ के रूप में विकसित किया जाए। उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि देश के हर गाँव का समुचित विकास हो। उन्होंने बताया कि डबल इंजन सरकार केवल शहरों और जिला मुख्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के हर गाँव और मजरे को विकसित करने, उन्हें बेहतर बनाने और वहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
पर्यावरण संतुलन और विकास के नए आयाम
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सरोवरों के निर्माण से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संतुलन भी बेहतर होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमृत सरोवरों के साथ-साथ गांवों के सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि ये ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन और आकर्षण के केंद्र के रूप में विकसित हो सकें।
भीषण गर्मी में बेजुबान पशुओं का सहारा बनेंगे सरोवर
उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी का उल्लेख करते हुए कहा कि अमृत सरोवर सिर्फ जल संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तेज धूप और गर्मी के दौरान पशु-पक्षियों के लिए भी बड़ी राहत का साधन हैं। उन्होंने बताया कि इन सरोवरों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों के लिए पीने के पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।
वर्षा ऋतु से पूर्व धरातल पर उतरेगी कार्ययोजना
आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बारिश शुरू होने से पहले जल संचयन की एक ठोस योजना तैयार की जाए और उसे केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। इसके लिए जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विकास की यह प्रक्रिया सिर्फ कुछ क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के अंतिम छोर तक बसे हर गांव और मजरे तक पहुंचे। साथ ही अमृत सरोवरों के आसपास पौधारोपण कर पर्यावरण संतुलन को मजबूत किया जाए और ग्रामीणों के लिए बैठने और टहलने की बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएं।


